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Saturday, December 3, 2022

जिले में घर-घर खोजे जाएंगे 50 वर्ष से अधिक उम्र के नेत्र रोगी

वाराणसी: ‘स्वस्थ दृष्टि, समृद्ध काशी’ के तहत जिले में 50 वर्ष से अधिक उम्र के नेत्र रोगियों के लिये अभियान चलाकर उनका मोतियाबिंद का आपरेशन व अन्य नेत्र रोगों का उपचार किया जायेगा। इसके साथ ही उन्हें  चश्मा भी प्रदान किया जायेगा। इसके लिए आशा व आंगनबाड़ी  कार्यकर्ता घर-घर जाकर स्क्रीनिंग करेंगी। इस अभियान में आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण प्रदान करने के कार्यक्रम का उद्धाटन मण्डलायुक्त कौशल राज शर्मा ने किया।


बड़ागांव के बचौरा कंपोजिट स्कूल में हुआ जागरूकता कार्यक्रम

चौकाघाट स्थित राजकीय आयुर्वेद स्नातकोत्तर महाविद्यालय एवं चिकित्सालय के सभागार में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए मण्डलायुक्त कौशल राज शर्मा ने कहा कि यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से एवं जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के नेतृत्व में श्री सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट चित्रकूट के सहयोग से किया जा रहा है। उन्होंने आशा व आंगनबाड़ी  कार्यकर्ताओं से कहा कि घर-घर स्कीनिंग के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखें कि कोई भी नेत्र रोगी छूटने न पाये ताकि काशी को मोतियाबिंद व अन्य नेत्र रोगों से मुक्त किया जा सके। उन्होंने कहा कि वृद्धावस्था में मोतियाबिंद जैसे रोगों के कारण बुजुर्गो को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कम दिखायी देने से अक्सर वह दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते है। ऐसे में बुजुर्ग नेत्र रोगियों को खोजकर उनका उपचार कराने से सभी को उनकी दुआ मिलेगी। उन्होंने आशा व आंगनबाड़ी  कार्यकर्ताओं से कहा कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि वह  इस कार्य को पूरी जिम्मेदारी से करते हुए एक मिसाल कायम करेंगी।

अंतर महाविद्यालय क्रॉस कंट्री दौड़ में महादेव पीजी कॉलेज बरियासनपुर विजयी

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. संदीप चौधरी ने बताया कि शुरू में यह अभियान शहरी क्षेत्र में चलेगा और बाद में इसे ग्रमीण क्षेत्रों में भी चलाया जायेगा। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षित  आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर 50 व इससे अधिक आयु वर्ग के लोगों का नेत्र परीक्षण करेंगी। इन लोगो की आँखों में किसी भी प्रकार की समस्या मिलेगी उन्हें रिफरल कार्ड देकर नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में होने वाले नेत्र जाँच शिविर में जाने के लिए प्रेरित किया जायेगा।

जिला स्तरीय दो दिवसीय नन्ही कली खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन  

अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी व जिला कार्यक्रम अधिकारी (अंधत्व) डा. एके मौर्या ने बताया कि चार चरणों में चलने वाले इस अभियान के पहले चरण में आशा व आंगनबाड़ी  कार्यकर्ताओं को स्क्रीनिंग के लिए प्रशिक्षित किया जायेगा। दूसरे चरण में घर-घर जाकर 50 या इससे अधिक  आयु वर्ग के लोगों का नेत्र परीक्षण करेंगी। तीसरे चरण में घर-घर नेत्र परीक्षण के दौरान रिफर किये गए व्यक्तियों का विस्तृत नेत्र परीक्षण नेत्र विशेषज्ञों द्वारा किया जायेगा। चौथे चरण में दृष्टि दोष से प्रभावित मरीजों को चश्मे का वितरण किया जायेगा एवं मोतियाबिंद के मरीजों को ऑपरेशन के लिए  उनकी सहमति से श्री सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय, जानकीकुण्ड-चित्रकूट ले जाया जायेगा। वहां उनको  उपचार के लिए कोई पैसा नहीं खर्च करना पड़ेगा | कार्यक्रम में राजकीय स्नाकोत्तर आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं चिकित्सालय की प्रधानाचार्य नीलम गुप्त, श्री सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय, जानकीकुण्ड-चित्रकूट के ट्रस्टी डा. इलेश जैन, मनोज पाण्डेय समेत अन्य लोग मौजूद थे।

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बड़ागांव के बचौरा कंपोजिट स्कूल में हुआ जागरूकता कार्यक्रम

वाराणसी: ‘विकलांग व्यक्तियों के लिए समर्पित अंतर्राष्ट्रीय दिवस’ पर राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत फाइलेरिया से ग्रसित रोगियों और उनकी दिव्यांग्ता के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से शनिवार को बड़ागांव ब्लॉक के बचौरा स्थित कंपोजिट स्कूल में कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार) संस्था द्वारा बनाये गए फाइलेरिया नेटवर्क समूह के सदस्यों ने बच्चों को फाइलेरिया (हाथी पाँव) से होने वाली विकलांगता के बारे में जागरूक किया। साथ ही दिव्यांग्ता के प्रति समर्थन और एकजुट होने के लिए बच्चों को प्रेरित भी किया। समूह के सदस्यों ने संस्था की ओर से मिल रहे सहयोग और अपने भी अनुभव साझा किए। 


अंतर महाविद्यालय क्रॉस कंट्री दौड़ में महादेव पीजी कॉलेज बरियासनपुर विजयी

इस मौके पर बच्चों के साथ फाइलेरिया दिव्यांग्ता को लेकर वाद-विवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें बच्चों ने बढ़चढ़ कर सहभागिता दिखाई। इसके पश्चात प्रधानाध्यापक मानिक राम, सीफार के जिला समन्वयक अम्बरीष राय व ब्लॉक समन्वयक विजय कुमार पटेल ने बच्चों को फाइलेरिया रोग और उससे होने वाली दिव्यांग्ता के बारे में बताया। साथ ही इस रोग के कारण, लक्षण, बचाव, उपचार, प्रबंधन आदि के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। 

जिला मलेरिया अधिकारी शरद चंद पांडे ने बताया कि फाइलेरिया उन्मूलन और रोगियों में दिव्यांग्ता दूर करने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है । सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार) संस्था द्वारा पिंडरा और बड़ागांव ब्लॉक में बनाये गए समूह के सदस्य भी सक्रिय हैं और सशक्त भूमिका निभा रहें हैं। समुदाय को फाइलेरिया के प्रति जागरूक कर रहे हैं साथ ही उनके मिथक व भ्रांतियों को भी दूर कर रहे हैं। फाइलेरिया नियंत्रण इकाई के प्रभारी व बायोलोजिस्ट डॉ अमित कुमार सिंह ने बताया कि दुनिया में दिव्यांग्ता का दूसरा प्रमुख कारण फाइलेरिया हाथीपांव है। फाइलेरिया क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। यह मच्छर गंदगी वाले स्थान पर पाये जाते हैं। इसके संक्रमण से लिम्फ़ेडोमा (हाथीपांव) और जननांगों (अंडकोष व स्तन) में सूजन हो जाती है। लिम्फ़ेडोमा गंभीर स्थिति में न हो, इसके लिए रोगियों को रुग्णता प्रबंधन के लिए एमएमडीपी किट और प्रशिक्षण दिया जा रहा है। फाइलेरिया से बचाने के लिये एमडीए का सेवन साल में एक बार सभी को करना चाहिये। सिर्फ दो साल से कम के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को छोड़कर।  

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बड़ागांव ब्लॉक में समूह से जुड़े लल्लन प्रजापति (55) का कहना है कि वह करीब 15 साल से हाथीपाँव से ग्रसित हैं। जानकारी न होने से वह अपने पैर की सही देखभाल और साफ-सफाई नहीं कर पर रहे थे लेकिन जब से इस समूह से जुड़ें है। तो पैर को काफी आराम मिला है। वह अब नियमित व्यायाम करते हैं जिस वजह से उनकी पैरों की सूजन धीरे-धीरे कम हो रही है। अमरावती देवी (65) का कहना है कि वह करीब 25 साल से हाथीपांव से ग्रसित हैं। इसकी वजह से दैनिक कार्य करने में बहुत दिक्कत आती है। दर्द भी रहता है। जब समूह के लोग उनसे मिले और उन्होने अपने अनुभव साझा किए। तो उन्होने आवश्यक दवा के साथ नियमित व्यायाम शुरू किया। वर्तमान में उनके पैर को काफी आराम है।

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वाराणसी: ककरमत्ता स्थित पॉपुलर ग्रुप हॉस्पिटल विगत पिछले 30 वर्षों से निकटवर्ती राज्य बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ, नेपाल, मध्य प्रदेश आदि को विश्वस्तरीय चिकित्सा सेवाएं प्रदान करता आ रहा है।


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इस चिकित्सकीय सेवाओं में एक कदम आगे बढ़ाते हुए पॉपुलर हॉस्पिटल ने अपनी पॉपुलर प्रताप आईवीएफ सेंटर का उद्घाटन करने जा रहा है जहां एक छत के नीचे सभी मरीजों को संपूर्ण चिकित्सा बेहद कम दरों पर आईवीएफ सुविधा उपलब्ध कराएगा।

प्रताप IVF राजस्थान में एक अनुभवी संस्थान है जिन के सहयोग से पॉपुलर हॉस्पिटल में पॉपुलर प्रताप आईवीएफ की सेवाएं अब वाराणसी का पॉपुलर हॉस्पिटल में देने जा रहा है। प्रताप आईवीएफ को आईवीएफ के क्षेत्र में 20 वर्षों का अनुभव है। प्रताप आईवीएफ को 2,000 से अधिक सफल आईवीएफ प्रेगनेंसी का अनुभव है।

वर्ष 2022 में बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में प्रताप आईवीएफ का विश्व में सबसे किफायती आईवीएफ सेंटर होने पर नाम दर्ज किया गया है। प्रताप आईवीएफ के सीनियर एम्ब्रयोलॉजिस्ट डॉक्टर विक्रम सिंह को उत्तर भारत का सर्वश्रेष्ठ एम्ब्रयोलॉजिस्ट अवार्ड से नवाजा गया है।

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प्रताप आईवीएफ वर्ष 2017 से राजस्थान सरकार के साथ राजस्थान के 3 मेडिकल कॉलेज व एक जिला अस्पताल में सरकारी स्कीम के तहत आईवीएफ सेंटर संचालित कर रहे हैं। एस. एम. एस. मेडिकल कॉलेज जयपुर, एस.पी. मेडिकल कॉलेज बीकानेर, एस.के. मेडिकल कॉलेज सीकर, ए.के.एच. गवर्नमेंट हॉस्पिटल ब्यावर। इस आईवीएफ सेंटर के खोलने से वाराणसी और आसपास के निःसंतान दंपतियों को अच्छी और किफायती इलाज के लिए किसी अन्य राज्य में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

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