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Thursday, November 30, 2023

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई जिला स्वास्थ्य समिति शाषी निकाय की समीक्षा बैठक

वाराणसी: जिलाधिकारी एस राजलिंगम की अध्यक्षता और मुख्य विकास अधिकारी हिमांशु नागपाल की उपस्थिती में बृहस्पतिवार को रायफल क्लब में देर शाम को जिला स्वास्थ्य समिति शाषी निकाय की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। 


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इस दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि एंबुलेंस के ठहरने के बाद स्ट्रेचर एवं व्हील चेयर की उपलब्धता रहना चाहिए। सभी सीएचसी व जिला अस्पताल इसकी उपलब्धता सुनिश्चित कर ली जाए। चिकित्सालयों और स्वास्थ्य केन्द्रों पर पीने का पानी, उपकरण आदि की व्यवस्था सुनिश्चित कर ली जाए। इसके किसी भी प्रकार की लापरवाही न की जाए। जिन चिकित्सालयों में अल्ट्रा साउंड मशीन है वहाँ प्रतिदिन सेवा दी जाए। डीएम ने कहा कि सभी सरकारी चिकित्सालयों के अधीक्षक व प्रभारीयों की ज़िम्मेदारी है कि आपके चिकित्सालय के खिलाफ कोई शिकायत न आए। आकस्मिकता की स्थिति में रोगी को उच्चीकृत स्वास्थ्य इकाई रेफर करने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। लघु पोषण पुनर्वास केंद्र (मिनी एनआरसी) में उपचारित बच्चों को एंबुलेंस के जरिये उनके घर तक छोड़ा जाए। 

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जिलाधिकारी ने प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) की प्रगति को लेकर अराजीलाइन सीएचसी और सेवापुरी पीएचसी की उपलब्धि लक्ष्य के सापेक्ष कम होने पर नाराजगी व्यक्त की। इसके लिए उन्होंने संबन्धित क्षेत्र की एएनएम की समीक्षा कर उन पर कार्यवाई करने का निर्देश दिया। आशा कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर प्रथम त्रैमास वाली गर्भवती महिलाओं का एएनसी पंजीकरण किया जाए। अक्रियाशील आशा कार्यकर्ताओं पर कार्यवाई सुनिश्चित की जाए। जननी सुरक्षा योजना के तहत लाभार्थियों का समय से भुगतान न करने के संबंध में पिंडरा पीएचसी के ब्लॉक अकाउंट मैनेजर (बीएएम) पर जांच समिति बनाकर त्वरित जांच की जाए। अगली बैठक में इसकी गहन समीक्षा की जाएगी और आगे की कार्यवाई सुनिश्चित की जाएगी। इस दौरान जिलाधिकारी ने बीएचयू में जननी सुरक्षा योजना के भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया। जिला महिला चिकित्सालय स्थित एमसीएच विंग के लाभार्थियों का शत-प्रतिशत भुगतान कराया जाए। विंग का निरीक्षण सभी कार्यक्रमों के अनुसार मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के द्वारा किया जाए।  

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पूर्ण प्रतिरक्षित बच्चों के मामले में पिंडरा व सेवापुरी पीएचसी की उपलब्धि कम होने पर जिलाधिकारी असंतोष व्यक्त किया। प्रभारी चिकित्साधिकारी को जल्द से जल्द शत-प्रतिशत पूरा करने के लिए निर्देशित किया। 'विकसित भारत संकल्प यात्रा' के दौरान छूटे हुये बच्चों का प्रत्येक दशा में टीकाकरण कराने का निर्देश दिया। अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा सीएचसी का रात्रि में निरीक्षण किया जाए। साथ जी यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई गर्भवती महिला जिसे सिजेरियन प्रसव की आवश्यकता है, उसे समय से प्रदान की जाए। परिवार नियोजन कार्यक्रम को लेकर जिलाधिकारी ने प्रत्येक माह में हर ब्लॉक 15-15 एवं नगरीय स्वास्थ्य केन्द्रों पर दो-दो पुरुष नसबंदी का लक्ष्य निर्धारित करने का निर्देश दिया। वहीं प्रत्येक माह में हर ब्लॉक 200 महिला नसबंदी और नगरीय स्वास्थ्य केंद्र 25-25 महिला नसबंदी के लक्ष्य को पूरा करे। इसके अलावा जिलाधिकारी ने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, सैम-मैम बच्चों का चिन्हान्कन, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना सहित अन्य कार्यक्रमों की प्रगति को लेकर विस्तार से समीक्षा की।

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बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ संदीप चौधरी ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के समस्त कार्यक्रमों और योजनाओं की प्रगति के बारे में सम्पूर्ण जानकारी दी। इस दौरान मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, अपर व उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला कुष्ठ रोग अधिकारी, जिला कार्यक्रम प्रबन्धक, डीएचईआईओ सहित अन्य चिकित्साधिकारी, स्वास्थ्यकर्मी, डबल्यूएचओ, यूनिसेफ, यूपीटीएसयू के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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फाइलेरिया उन्मूलन के लिए पीएचसी बड़ागांव पर लगा एमएमडीपी कैंप

वाराणसी: जनपद को फाइलेरिया मुक्त बनाने व दिव्यांग्ता रोकथाम के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में बृहस्पतिवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) बड़ागांव पर फाइलेरिया (हाथी पांव) से ग्रसित 60 रोगियों को रुग्णता प्रबंधन व दिव्यांग्ता रोकथाम (एमएमडीपी) किट और आवश्यक दवा प्रदान की गई। साथ ही रोगियों को घाव की नियमित सफाई के तरीके, योगा व सामान्य व्यायाम के बारे में बताया गया। यह कार्यक्रम स्वास्थ्य विभाग तत्वावधान में पाथ व सीफार संस्था के सहयोग से आयोजित किया गया। 


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इस मौके पर जिला मलेरिया अधिकारी (डीएमओ) शरत चंद पाण्डेय, प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ शेर मोहम्मद, पाथ के आरएनटीडीओ डॉ सरीन कुमार और सीफार के जिला समन्वयक ने सभी रोगियों को एमएमडीपी किट के बारे में सभी रोगियों को प्रशिक्षित किया और एमएमडीपी किट प्रदान की। इस दौरान फाइलेरिया रोगी सहायता समूह (पीएसजी) नेटवर्क के 42 रोगियों को भी किट व प्रशिक्षण दिया गया। शेष नॉन पीएसजी सदस्य हैं। 

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डीएमओ ने बताया कि फाइलेरिया ग्रस्त अंगों मुख्यतः पैर की साफ-सफाई रखने से संक्रमण का डर नहीं रहता है और सूजन में भी कमी रहती है। इसके प्रति लापरवाही बरतने पर अंग खराब होने लगते हैं। इससे समस्या बढ़ जाती है। संक्रमण को बढ़ने से रोकने के लिए दवा भी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि जिनके हाथ-पैर में सूजन आ गई है या फिर उनके फाइलेरिया ग्रस्त अंगों से पानी का रिसाव होता है। इस स्थिति में उनके प्रभावित अंगों की साफ-सफाई बेहद आवश्यक है। इसलिए एमएमडीपी किट प्रदान की जा रही है। इस किट में एक-एक टब, मग, बाल्टी तौलिया, साबुन, एंटी फंगल क्रीम आदि शामिल हैं। पीएसजी नेटवर्क के सदस्य समुदाय को फाइलेरिया के प्रति जागरूक कर रहे हैं। साथ ही बीमारी से जुड़े मिथक को भी दूर कर रहे हैं। 

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डॉ सरीन कुमार ने सभी आशा कार्यकर्ताओं और संगिनी को फाइलेरिया (हाथ-पैरों में सूजन और अंडकोषों में सूजन) के कारण, लक्षण, पहचान, जांच, उपचार व बचाव आदि के बारे में विस्तार से बताया। फाइलेरिया की सभी ग्रेडिंग (हाथ-पैरों में सूजन व घाव की स्थिति) के बारे में जानकारी दी। एमएमडीपी किट को हाथीपांव ग्रसित रोगियों के उपयोग के बारे में बताया।

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पीएसजी सदस्य समुदाय को कर रहे जागरूक – पीएसजी सदस्य सायरा बानो (55) ने बताया कि वह लगभग 15 वर्ष से हाथीपांव बीमारी से ग्रसित हैं। उन्होंने कई वर्षों तक इलाज कराया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। अब पीएसजी समूह के साथ जुड़कर डॉक्टर से इसकी देखभाल के लिये सम्पूर्ण जानकारी मिली, जिससे वह अपने सूजे हुये पैरों की नियमित देखभाल कर रही हैं। अन्य सदस्य विमला सिंह (70) ने बताया कि वह करीब 55 साल से फाइलेरिया हाथीपांव से ग्रसित हैं। कई वर्षों तक उपचार कराया, दवा भी खाई लेकिन आराम नहीं मिला। हाल ही में पीएसजी समूह के साथ जुड़ने के बाद फाइलेरिया के बारे में सम्पूर्ण जानकारी मिली। अब वह किट के जरिये  अपने सूजे हुये पैरों की साफ-सफाई और देखभाल करेंगी। साथ ही योगा व सामान्य व्यायाम भी करेंगी। इसके अलावा समुदाय में फाइलेरिया से बचाव के बारे में जागरूक करने में मदद करेंगी। दोनों रोगियों को उपचार के लिए चौकाघाट स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में संचालित फाइलेरिया एकीकृत उपचार केंद्र के लिए रेफर किया गया है।   

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इस मौके पर स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी (एचईओ) दिवाकर वर्मा, मलेरिया निरीक्षक विनोद कुमार, सीनियर लैब टेक्निशियन राजेश यादव, हेल्थ सुपरवाइज़र अजय कुमार राय, पाथ से डॉ सरीन कुमार, सीफार संस्था के प्रतिनिधि एवं अन्य लोग उपस्थित रहे।

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टीबी मुक्त पंचायत अभियान की अलख जगाएँगे एनएसएस के वालंटियर

वाराणसी: टीबी मुक्त पंचायत अभियान के प्रति समुदाय को जागरूक करने के लिए पीरमल फ़ाउंडेशन और महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) हुआ है। अभियान की अलख जगाने के लिए एनएसएस के वालंटियर जनपद के ग्रामीण व नगरीय क्षेत्र में भ्रमण कर लोगों को जागरूक करेंगे। इसी को लेकर बृहस्पतिवार को महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के केन्द्रीय पुस्तकालय में संयुक्त बैठक आयोजित की गई।


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बैठक की अध्यक्षता कर रहे एनएसएस के कार्यक्रम समन्वयक डॉ रविन्द्र कुमार गौतम ने सभी डिग्री कॉलेज में स्थित एनएसएस के कार्यक्रम अधिकारी से अभियान में पूर्ण रूप से सहयोग करने की अपील की। एनएसएस, स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण आदि क्षेत्र में लगातार प्रशासन का सहयोग कर रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने के लिए टीबी मुक्त पंचायत अभियान बेहद महत्वपूर्ण अभियान है। टीबी लक्षण युक्त व्यक्तियों की जांच, सम्पूर्ण उपचार, आर्थिक मदद, पोषण व भावनात्मक सहयोग के लिए भारत सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। वहीं गैर स्वयं सेवी संस्थाएं इस अभियान में समुदाय को जागरूक करने के लिए लगातार आगे आ रहे हैं। इसी क्रम में पीरामल फ़ाउंडेशन के साथ एक एमओयू साइन हुआ है, जिसके अंतर्गत सभी डिग्री कॉलेज में स्थापित एनएसएस विंग के वालंटियर संबन्धित क्षेत्र में लोगों को टीबी के लक्षण, कारण, जांच, उपचार आदि के बारे में जागरूक करेंगे। इसके साथ ही उपचाराधीन टीबी मरीजों को सम्पूर्ण उपचार कराने, एक भी दिन दवा न छोड़ने, प्रोटीन युक्त आहार लेने आदि के प्रति जागरूक करेंगे।

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बैठक में पीरमल फ़ाउंडेशन के अरविंद गुप्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी साल विश्व क्षय रोग दिवस (24 मार्च) पर टीबी मुक्त पंचायत अभियान की शुरुआत की थी। जिला प्रशासन, स्वास्थ्य व पंचायती राज विभाग के साथ मिलकर पीरामल फ़ाउंडेशन ने वाराणसी के पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चोलापुर ब्लॉक में टीबी मुक्त पंचायत अभियान की शुरुआत की थी, जिसमें ग्राम प्रधान, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ), आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित कर चोलापुर की सभी 89 ग्राम पंचायतों में अभियान को सक्रिय रूप से संचालित किया गया। मोबाइल वैन चलाकर समुदाय को जांच व उपचार के लिए जागरूक भी किया गया। इसी तरह कार्य अब एनएसएस के साथ मिलकर शुरू किया जा रहा है।

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इस दौरान उन्होंने एनएसएस के कार्यक्रम समन्वयक और समस्त डिग्री कॉलेज के समन्वयक से यही उम्मीद की है कि टीबी मुक्त पंचायत अभियान के प्रति जन जागरूकता को लेकर संयुक्त रूप से कार्य करने के लिए आगे आएं। अभियान की सफलता के लिए सभी आठ ब्लॉक से चयन किए गए 10-10 ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधानों की भूमिका अहम होगी जो एनएसएस केवालंटियर को सहयोग करेंगे। ज्यादा से ज्यादा स्क्रीनिंग पर ज़ोर दिया जाएगा। इसकी सफलता को देखते हुए भविष्य में और भी जनपदों में मोबिलाइज़ेशन का कार्य किया जाएगा। इसके अलावा अन्य स्थानीय स्वयं सेवी संस्थाओं के साथ मिलकर कार्य किया जाएगा। अंत में उन्होंने “हाँ, हम टीबी को खत्म कर सकते हैं। टीबी हारेगा – देश जीतेगा” का संदेश दिया।

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इसके अतिरिक्त बैठक में एनएसएस के लिए वर्ष 2022-23 के लिए 25 प्रतिशत अनुदान स्वीकृति के उपरांत प्रत्येक डिग्री कॉलेज के इकाई पोर्टल पर धनराशि प्रेषित कर दी गई है। इस धनराशि को आहरण के लिए डॉ जयशंकर सिंह तथा लालता प्रसाद ने जानकारी दी। इस मौके पर पीरामल फ़ाउंडेशन की रूबी सिंह, अवनीश राय, अमित कुमार शर्मा, सूरज, सायनी, हिमांशी, मनोज एवं एनएसएस के कार्यक्रम अधिकारी मौजूद रहे।

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Wednesday, November 29, 2023

जनपद में आज से शुरू होगा पीएमएमवीवाई का "विशेष पंजीकरण अभियान"

वाराणसी: गर्भवती व बच्चों के स्वास्थ्य व पोषण को बेहतर करने के लिए सरकार द्वारा चलायी जा रही प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई) के तहत लाभार्थियों का पंजीकरण करने के लिए "विशेष पंजीकरण अभियान" बृहस्पतिवार और शुक्रवार ( 30 नवम्बर व एक दिसंबर) को चलाया जाएगा। इसके अंतर्गत गर्भवती एवं धात्री माताओं को प्रथम सन्तान एवं द्वितीय सन्तान (लड़की) होने पर लाभ दिये जाने के लिए ज्यादा से ज्यादा पंजीकरण पर जोर दिया जायेगा। यह जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ संदीप चौधरी ने बुधवार को दी। 


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मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि पीएमएमवीवाई, सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके अन्तर्गत जनपद में इस वित्तीय वर्ष में दिसंबर तक लगभग 22 हजार गर्भवती एवं धात्री माताओं को प्रथम सन्तान एवं द्वितीय सन्तान (लड़की) होने पर लाभ दिये जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार की टीम भी अनुश्रवण ( मॉनिटरिंग) के लिए चिकित्सा इकाई में प्रतिभाग करेंगी, जिसके क्रम में निर्देशित किया जा चुका है। 

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इनसे करें संपर्क – मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि योजना की सफलता के लिए अधिक से अधिक महिलाओं को लाभान्वित किया जाना वांछित है, जिसके लिए विशेष गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा । पंजीकरण के लिए नगरीय स्वास्थ्य इकाइयों पर एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं से संपर्क किया जा सकता है। ग्रामीण स्वास्थ्य इकाइयों पर बीपीएम, बीसीपीएम, एमसीटीएस ऑपरेटर, एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं से संपर्क किया जा सकता है।  

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लाभ के लिए पंजीकरण अनिवार्य– योजना के नोडल अधिकारी व उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ एचसी मौर्य ने बताया कि गर्भधारण से 570 दिन के अन्दर लाभ के लिए पंजीकरण किया जा सकता है। साथ ही पहली बार माँ बनने वाली गर्भवती के लिए मिलने वाली राशि केवल दो किश्तों में देय होगी, जिसमें प्रथम किश्त 3000 रुपये एवं द्वितीय किश्त 2000 रुपए के रूप में लाभार्थी के पंजीकृत बैंक खाते में भेजी जाती है। वहीं अब नई व्यवस्था के अन्तर्गत द्वितीय संतान बालिका होने पर धनराशि 6000 रुपए एकमुश्त दी जाएगी। इसमें शिशु के जन्म से 270 दिन के अन्दर लाभ के लिए पंजीकरण किया जा सकता है। द्वितीय संतान बालिका यदि एक अप्रैल 2022 को या उसके बाद जन्म लेने की दशा में लाभ के लिए 31 दिसंबर 2023 तक पंजीकरण किया जा सकता है। 

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पीएमएमवीवाई वर्जन 2.0 - योजना की जिला कार्यक्रम समन्वयक शालिनी श्रीवास्तव ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और मिशन शक्ति के अन्तर्गत उपयोजना सामर्थ्य के माध्यम से योजना अब पीएमएमवीवाई वर्जन 2.0 के नाम से जानी जा रही है। उन्होंने बताया कि योजना का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन pmmvy.wcd.gov.in पर किया जाएगा। गूगल प्ले स्टोर पर मौजूद ‘पीएम योजना एप’ को डाउनलोड कर लाभार्थी स्वयं पंजीकरण कर सकती हैं। योग्य लाभार्थी महिलाओं को योजना का लाभ लेने के लिए पहले आवेदन करना होगा। आवेदन में सभी तरह के आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे। आवेदन सही पाए जाने के बाद ही उन्हें इस योजना का लाभ मिल पाएगा। लाभार्थी पात्रता के लिए अपलोड किए जाने वाले इन प्रमाणपत्रों में से कोई एक लाभार्थी के पास होना जरूरी है - 

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  • महिलाएं जिनकी कुल वार्षिक आय रुपये आठ लाख प्रति वर्ष से कम हो
  • मनरेगा (MGNREGA) जॉब कार्ड धारक महिला
  • महिला किसान जो किसान सम्मान निधि लाभार्थी हो
  • ई-श्रम कार्ड धारक महिलाएं
  • आयुष्मान भारत के अन्तर्गत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएमजेएवाई) लाभार्थी महिलाएं।
  • बी०पी०एल० राशन कार्ड धारक महिलायें। 
  • महिलाएं जो आंशिक रूप से (40प्रतिशत) या पूर्णतः दिव्यांग 
  • अनुसूचित जाति (एससी) महिलाएं
  • अनुसूचित जनजाति (एसटी) महिलाएं
  • गर्भवती एवं धात्री महिला आंगनवाड़ी वर्कर / आंगनवाड़ी सहायिका / आशा
  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) 2013 के अन्तर्गत राशन कार्ड लाभार्थी महिलाएं

पुरुष नसबंदी के प्रति जागरूकता के लिए रवाना हुए ‘सारथी वाहन’

वाराणसी: परिवार कल्याण कार्यक्रम के अंतर्गत 21 नवंबर से चल रहे पुरुष नसबंदी पखवाड़ा के तहत बुधवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय परिसर से सीएमओ डॉ संदीप चौधरी के निर्देशन में सारथी वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस मौके परडिप्टी सीएमओ व नोडल अधिकारी डॉ एचसी मौर्य ने पुरुष नसबंदी के प्रति समुदाय को जागरूक करने, उनके व्यवहार में परिवर्तन लाने और स्वस्थ व खुशहाल परिवार में अपनी सहभागिता निभाने को लेकर संदेश दिया।


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डिप्टी सीएमओ ने बताया कि जनपद में पुरुष नसबंदी पखवाड़ा 21 नवंबर से दो चरणों में संचालित किया जा रहा है, जिसके पहले चरण में अपना परिवार पूरा कर चुके 60 वर्ष से कम उम्र के पुरुषों को नसबंदी कराने के लिए जागरूक किया जा रहा है। साथ ही उनकी साथी पत्नी और परिवार को भी प्रेरित किया जा रहा है। पखवाड़े का दूसरा चरण सेवा प्रदायगी चरण 28 नवंबर से शुरू हो चुका है। प्रतिदिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चौकाघाट में पुरुष नसबंदी शिविर लगाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बुधवार को नगरीय क्षेत्र के लिए दो सारथी वाहनों को रवाना किया गया। यह सारथी वाहन आगामी दिवसों में नगर के सभी क्षेत्रों में भ्रमण कर समुदाय को जागरूक करेंगे। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्र के आठ ब्लाक के लिए तीन-तीन सारथी वाहन संचालित किए जाएंगे। इस तरह देखा जाए तो पूरे जनपद के लिए 26 सारथी वाहन तक चलाए जाएंगे। इनके माध्यम से परिवार नियोजन के शेष साधन जैसे - महिला नसबंदी (स्थायी साधन) और अस्थाई साधन जैसे - अंतरा, छाया, पीपीआईयूसीडी, आईयूसीडी, कंडोम आदि गर्भनिरोधक साधन आदि के बारे में समुदाय को जागरूक किया जाएगा। 

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छोटे व सीमित परिवार के लिए करेंगे जागरूक – सीएमओ डॉ संदीप चौधरी ने बताया कि यह सारथी वाहन क्षेत्र में भ्रमण कर परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता फैलाएंगे। छोटे परिवार के फायदे बताते हुए परिवार नियोजन के स्थाई व अस्थाई साधन अपनाने के लिए जनमानस को जागरूक किया जाएगा। साथ ही समाज में परिवार नियोजन के विषय में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने एवं लोगों को जागरूक करने के लिए सारथी वाहन द्वारा मिशन परिवार विकास के अंतर्गत चलाये जाने वाले विभिन्न कार्यक्रमों के बारे में लोगों को जानकारी दी जाएगी। इसके लिए ऑडियो क्लिप एवं पम्पलेट्स का भी सहारा लिया जाएगा। 

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आशा कार्यकर्ता, एएनएम व सीएचओ करेंगे काउंसिलिंग- डॉ एचसी मौर्य ने बताया कि ऐसे पुरुष व महिलाएं जिनके दो या उससे अधिक बच्चे हैं और उनका परिवार पूरा हो चुका है, उन्हें नसबंदी के लिए प्रेरित किया जाएगा। इन वाहनों के माध्यम से सभी आशा कार्यकर्ता, एएनएम, और सीएचओ ऐसे योग्य दंपति से संपर्क कर काउंसिलिंग करेंगे, जिनका परिवार पूरा हो गया है या जो दो बच्चों में अंतर रखना चाहते हैं। समुदाय को माला एन, छाया, कंडोम, अंतरा इंजेक्शन, पुरुष नसबंदी, महिला नसबंदी, पीपीआईयूसीडी, आईयूसीडी आदि के बारे में जानकारी दी जाएगी। 

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इस दौरान एसीएमओ डॉ एसके मौर्य, डॉ पीयूष राय, डीएचईआईओ हरिवंश यादव, डीपीएम संतोष सिंह, जिला सलाहकार (तंबाकू नियंत्रण) डॉ सौरभ प्रताप सिंह, एआरओ अनूप उपाध्याय, सुनील, पीएसआई इंडिया से अखिलेश, सी-थ्री संस्था से अनूप राय सहित अन्य अधिकारी व स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे।

Friday, November 24, 2023

टीबी एसीएफ़ अभियान में जिले की 20 प्रतिशत आबादी की होगी स्क्रीनिंग” – सीएमओ

वाराणसी: प्रधानमंत्री के वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त भारत बनाने के संकल्प को लेकर विभाग हर संभव प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) व प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत जनपद में सक्रिय टीबी रोगी खोज (टीबी एसीएफ़) अभियान का शुभारंभ किया गया। इस मौके पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय परिसर से जन जागरूकता रैली निकाली गई। सीएमओ डॉ संदीप चौधरी ने रैली को हरी झंडी दिखाकर टीबी एसीएफ़ अभियान का आगाज़ किया।  


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सीएमओ ने बताया कि अभियान को सफल बनाने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। जनपद की आबादी करीब 44 लाख है लेकिन विशेष अभियान के तहत 20 प्रतिशत आबादी की स्क्रीनिंग की जाएगी। उन्होंने कहा कि टीबी के जीवाणु रोगी के खाँसने, छींकने और थूकने से हवा में फैल जाते हैं और साँस लेने से स्वस्थ व्यक्ति के फेफड़े में पहुँचकर रोग उत्पन्न करते हैं। टीबी का रोगी एक वर्ष में 10 से 15 स्वस्थ व्यक्तियों को संक्रमित कर सकता है। इसलिए इस अभियान में टीबी के लक्षण युक्त (संभावित रोगियों) व्यक्तियों की जांच की जाएगी और जांच में टीबी की पुष्टि होने पर तत्काल उपचार शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही निक्षय पोषण योजना के तहत टीबी रोगियों को उनके उपचार के दौरान हर माह 500 रुपये की आर्थिक सहायता डीबीटी के माध्यम से बैंक खाते में प्रदान की जाती है।

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जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डॉ पीयूष राय ने बताया कि अभियान के लिए 225 टीम और 45 सुपरवाइजर तैनात किए गए हैं। स्वास्थ्यकर्मी संभावित क्षय रोगियों की जांच करेंगे और टीबी की पुष्टि होने पर 48 घंटे के अंदर उपचार शुरू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान आवासीय परिसरों, जैसे अनाथालयों, वृद्धाश्रमों, नारी निकेतन, बाल संरक्षण गृह, मदरसों और छात्रावासों में कैंप आयोजित कर टीबी के प्रति संवेदीकरण किया जाएगा और लक्षण युक्त व्यक्ति के स्पुटम (बलगम) के नमूने एकत्र किए जाएंगे।

संवेदनशील क्षेत्रों पर  होगा ज़ोर – डीटीओ ने बताया कि अभियान के दौरान माइक्रोप्लान के मुताबिक संवेदनशील क्षेत्रों (घनी बस्ती और स्लम एरिया) को कवर करते हुए जनपद की 20 प्रतिशत आबादी की स्क्रीनिंग की जाएगी। रोगी के बलगम की जांच करवाने पर फेफड़ों की टीबी का पता लग सकता है। बलगम के दो नमूनों की जांच माइक्रोस्कोपी एवं सीबीनॉट मशीन द्वारा की जाती है, जिससे टीबी की पुष्टि होती है। इसके साथ ही सभी रोगियों की शुगर और एचआईवी जांच भी की जाएगी। अभियान की समस्त रिपोर्ट को निक्षय पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।

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इस मौके पर डिप्टी सीएमओ डॉ एचसी मौर्य, डॉ अमित सिंह, डॉ वाईबी पाठक, डीएचईआईओ हरिवंश यादव, सहायक मलेरिया अधिकारी केके राय, जिला सलाहकार (तंबाकू नियंत्रण) डॉ सौरभ प्रताप सिंह, डॉ शिशिर, डीपीसी संजय चौधरी, एसटीएस उदय सिंह, टीबीएचवी रामकृष्ण शुक्ला, आशा कुसुम देवी, रीना देवी, सरस्वती देवी, मनिता देवी एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अनीता देवी व अनीता राव एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे।   

टीबी का इलाज – टीबी रोगी के इलाज के लिए जिले में टीबी की दवा स्वास्थ्य कार्यकर्ता के सीधी देखरेख में खिलाई जाती हैं जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि मरीज सही दवा निश्चित समय पर पूरी अवधि तक खाकर शीघ्र रोग मुक्त हो जाए। 

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इन बातों का रखें ध्यान –  

  • दो हफ्ते या उससे अधिक खाँसी, खाँसी के साथ बलगम आना, रात में पसीना आना, भूख न लगना और वजन में लगातार गिरावट टीबी हो सकती है। ऐसे लक्षण देने पर तुरन्त नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र पर सम्पर्क करें। 
  • टीबी की समस्त आधुनिक जाँच एवं सम्पूर्ण उपचार समस्त सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों पर निःशुल्क उपलब्ध है।
  • अधिक जानकारी के लिए टोल फ्री नम्बर 1800-11-6666 पर संपर्क कर सकते हैं और टीबी आरोग्य सेतु एप को भी डाउनलोड करें।

Thursday, November 23, 2023

निक्षय मित्र के रूप में क्षय रोगियों को गोद लेकर पोषण व उपचार में कर रहीं मदद

वाराणसी: पोलियो की तर्ज पर भारत से टीबी को भी हराएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2025 में जिस टीबी मुक्त भारत का सपना देखा है उसको साकार करने के लिए हम सबको आगे आना होगा और कदम से कदम मिलाकर इस पर कार्य करना होगा। एक-एक टीबी मरीज को गोद लिया जाए तो वह दिन दूर नहीं जब देश टीबी से पूरी तरह मुक्त होगा। भविष्य में टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत टीबी रोगियों के परिवार को टीबी मुक्त और सक्षम बनाने के लिए निक्षय मित्र के रूप में सहयोग कर रहीं डॉ स्वर्णलता सिंह ने मंगलवार को अक्षय नवमी के दिन 30 क्षय रोगियों व उनके परिवार के एक सदस्य को भी पोषण पोटली प्रदान की। पोषण पोटली में मूँगफली, सत्तू, भुना चना, दलिया और प्रोटीन संपूरक दिया गया।


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अनुराग मातृ सदन की प्रबंधक डॉ स्वर्ण लता सिंह ने मंगलवार को अपने पैतृक गांव पिलखीनी रोहनियां में सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) डॉ. संदीप चौधरी एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में ए.डी.सी.पी. ममता रानी व जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ पीयूष राय मौजूद रहे। मुख्य चिकित्साधिकारी ने कहा कि टीबी मुक्त भारत के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है। सरकारी योजनाओं के तहत टीबी के मरीजों को उपचार के दौरान निक्षय पोषण योजना के तहत उनके खाते में पांच सौ रुपये दिए जाते हैं। उन्होंने डॉ. स्वर्णलता सिंह की ओर से किए जा रहे कन्यादान रूपी विवाह सहयोग राशि की भी सराहना की। 

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ए.डी.सी.पी. ममता रानी ने कहा कि ऐसे पुनीत कार्य समाज में हर व्यक्ति को करना चाहिए, जिससे अन्य लोगों को प्रेरणा मिले, उन्होंने मिशन शक्ति के तहत लड़कियों को आत्मरक्षा का गुर भी बताया। सामाजिक कार्यक्रम के तहत 50 कुपोषित बच्चों में भरपूर राशन वितरित किया गया। इसके साथ इस वर्ष भी गरीब कन्याओं के विवाह के लिए सहयोग राशि प्रदान की गयी। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डा. स्वर्णलता सिंह ने कहा कि दुनिया में मानवसेवा से बढ़कर कोई सेवा नहीं। गरीबों की सेवा और उनकी थाली में अन्नदान की व्यवस्था करना एक पुनीत कार्य है। विगत पांच वर्षों से अक्षय नवमी तिथि पर आयोजित कार्यक्रम के तहत इस बार भी 21 गरीब कन्याओं की शादी के लिए योगदान दिया। इसके साथ ही कंबल का दान, कुपोषित बच्चों को राशन प्रदान किया गया। इससे पूर्व कंपोजिट विद्यालय हरहुआ में 25 बच्चों को प्रशिक्षण का सामग्री प्रदान की गयी। डा. स्वर्ण लता सिंह की ओर से प्रतिवर्ष यह सामाजिक कार्यक्रम अपने पैतृक गांव पिलखीनी रोहनियां में आयोजित किया जाता है। 

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उन्होंने बताया कि वह पूर्व में विगत दस वर्षों तक कबीर चौरा राजकीय महिला चिकित्सालय में कार्यरत रही हैं। इस दौरान उन्हें परिवार नियोजन में सर्वश्रेष्ठ योगदान के लिए वीर बहादुर सिंह के द्वारा दो बार गोल्ड मेडल तथा प्रशंसा पत्र से सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में प्रधानमंत्री की ओर से आयोजित कार्यक्रमों में सहयोग रहता है। जिसके तहत बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, गरीब कन्याओं के विवाह में योगदान, आईसीडीएस के तहत संचालित कुपोषण मुक्त भारत के तहत कुपोषित बच्चों को अन्नदान तथा निःशुल्क टीकाकरण व स्वास्थ्य शिविर शामिल है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रीति मौर्या एवं डा. फरहीन नाज़ ने किया। इस अवसर पर पीएन सिंह, ध्रुव नारायण सिंह, श्रीमती परख सिंहं, रमा उदल, डा. शांति गुप्ता,  डा. वर्णिका आदित्य, डा. विजय लक्ष्मी, डॉ. प्रभात. सहित अनुराग मातृ सदन के अन्य लोग उपस्थित रहे।

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Saturday, November 18, 2023

जिला महिला चिकित्सालय व चोलापुर सीएचसी में होगा हेल्दी बेबी शो का आयोजन

 वाराणसी: नवजात शिशु देखभाल सप्ताह के अंतर्गत शनिवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय सभागार में जनपद स्तरीय संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता सीएमओ डॉ संदीप चौधरी ने की। स्वास्थ्य विभाग के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में न्यूट्रिशन इंटरनेशनल (एनआई) संस्था ने सहयोग प्रदान किया।  


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इस अवसर पर सीएमओ ने संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के साथ ही प्रसव कक्ष में नवजात शिशु की देखभाल वहाँ स्थित न्यू बोर्न केयर कॉर्नर के माध्यम से की करने की बात कही। उन्होंने कहा कि समय से पूर्व जन्मे व कम वजन के नवजात शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन व देखभाल के लिए स्वास्थ्य इकाइयों पर स्थापित सिक न्यूबोर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) एवं न्यूबोर्न स्टेबलाइज़ेशन यूनिट (एनबीएसयू) को लगातार सुदृढ़ किया जाए। साथ ही एसएनसीयू और एनबीएसयू से डिस्चार्ज होने वाले कम वजन के नवजात शिशु (एलबीडब्ल्यू) या समय से पहले जन्मे (प्री-मैच्योर) शिशुओं की घर पर आशा कार्यकर्ताओं के द्वारा गृह भ्रमण के दौरान विशेष देखभाल करने पर पूरा ज़ोर दिया। उन्होंने लगातार फॉलो अप करने का निर्देश भी दिया। इसके अलावा सामुदायिक स्तर पर संचालित किए जा रहे होम बेस्ड न्यूबोर्न केयर (एचबीएनसी) व होम बेस्ड यंग चाइल्ड केयर (एचबीवाईसी) यानि गृह आधारित नवजात शिशु देखभाल कार्यक्रम को सुदृढ़ करने पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नवजात शिशु के जीवन की बेहतर शुरुआत के लिए स्वास्थ्य इकाइयों के सामुदायिक कार्यकर्ताओं एवं परिवार की अहम भूमिका होती है। इसलिए इस बार की थीम “समुदाय के माध्यम से नवजात शिशु के जीवन का पोषण स्वास्थ्य - सुविधा व सहभागिता” निर्धारित की गई है।

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आशा कार्यकर्ता सिखाएँ होम बेस्ड केएमसी विधि – सीएमओ ने कहा कि समय से पूर्व जन्मे व कम वजन के नवजात शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन व देखभाल के लिए आशा कार्यकर्ता के द्वारा गृह भ्रमण के दौरान माँ और उसके परिवार को होम बेस्ड कंगारू मदर केयर विधि के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाए। इस विधि में त्वचा से त्वचा का संपर्क होने से शिशु को काफी आराम मिलता है। माँ के साथ घर का कोई भी सदस्य इस विधि को कर सकता है। एक दिन में पाँच से छह बार और हर बार कम से कम एक घंटे के लिए केएमसी विधि की जा सकती है।

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टीकाकरण भी बेहद जरूरी – सीएमओ ने कहा कि चिकित्सक की सलाह के अनुसार शिशु को जन्म के समय लगने वाले सभी टीके अवश्य लगवाएँ। टीकाकरण से शिशु की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और संक्रमण का खतरा भी कम रहता है।   

यहाँ होंगी गतिविधियां - कार्यक्रम के नोडल अधिकारी व डिप्टी सीएमओ डॉ एचसी मौर्य ने बताया कि आगामी दिनों में जिला महिला चिकित्सालय व चोलापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (सीएचसी) पर हेल्दी बेबी शो का आयोजन किया जाएगा। साथ ही अराजीलाइन सीएचसी, चोलापुर सीएचसी, सेवापुरी पीएचसी, चिरईगांव पीएचसी, हरहुआ पीएचसी और बड़ागांव पीएचसी पर जन जागरूक गोष्ठी का आयोजन किया जाएगा।

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न्यूट्रिशन इंटरनेशनल की मंडलीय समन्वयक अपराजिता सिंह ने बताया कि इस साल अप्रैल से से अब तक चोलापुर सीएचसी पर संचालित एनबीएसयू में 300 और अराजीलाइन सीएचसी में 85 नवजात शिशुओं को भर्ती किया जा चुका है, सभी स्वस्थ होकर घर गये, जिनका फॉलो अप आशा कार्यकर्ता के द्वारा किया जाना चाहिए।     

कार्यक्रम के नोडल अधिकारी व डिप्टी सीएमओ डॉ एचसी मौर्य, एसीएमओ डॉ एके मौर्य, डॉ संजय राय, डॉ एसएस कनौजिया, डॉ पीयूष राय, जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी हरिवंश यादव, जिला कार्यक्रम प्रबन्धक संतोष सिंह, एनआई संस्था की मंडलीय समन्वयक अपराजिता सिंह समेत समस्त ग्रामीण व नगर स्तरीय सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के अधीक्षक, प्रभारी व अन्य चिकित्साधिकारी कार्यशाला में शामिल रहे।

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सुपरवाइज़रों की निगरानी में स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर खोजेंगे टीबी रोगी

वाराणसी: टीबी मुक्त भारत अभियान को सफल बनाने के लिए क्षय रोग विभाग निरंतर प्रयासरत है। इसके लिए टीबी की शीघ्र जाँच और इलाज पर पूरा जोर दिया जा रहा है। इसी के तहत विभाग एक बार फिर टीबी रोगियों को खोजने के लिए एक्टिव केस फाइंडिंग (एसीएफ) यानि सक्रिय टीबी रोगी खोज अभियान शुरू करने जा रहा है। इस बारे में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन-उत्तर प्रदेश की मिशन निदेशक डॉ पिंकी जोवल ने सभी जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को पत्र भेजा है। अभियान की तैयारियों को लेकर शनिवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय सभागार में बैठक आयोजित हुई, जिसमें ग्रामीण व नगर स्तरीय सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के अधीक्षक, प्रभारी व अन्य चिकित्साधिकारी शामिल रहे।


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बैठक की अध्यक्षता कर रहे सीएमओ डॉ संदीप चौधरी ने बताया - मिशन निदेशक के पत्र में माइक्रोप्लान तैयार कर संवेदनशील क्षेत्रों में 23 नवंबर से पांच दिसंबर तक एसीएफ अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। जनपद की आबादी करीब 44 लाख है लेकिन विशेष अभियान के तहत 20 प्रतिशत आबादी की स्क्रीनिंग की जाएगी। टीबी के लक्षण युक्त (संभावित रोगियों) व्यक्तियों की जांच की जाएगी और जांच में टीबी की पुष्टि होने पर तत्काल उपचार शुरू किया जाएगा। 

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जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डॉ पीयूष राय ने बताया - राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के अन्तर्गत 23 नवंबर से पांच दिसंबर तक यह अभियान चलेगा। स्वास्थ्य कर्मी घर-घर जाकर टीबी रोगियों को खोजेंगे। माइक्रोप्लान तैयार किया जा चुका है। अभियान के लिए कुल 225 टीम और 45 सुपरवाइजार तैनात किए गए हैं। समस्त स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। स्वास्थ्यकर्मी संभावित क्षय रोगियों की जांच करेंगे और टीबी की पुष्टि होने पर 48 घंटे के अंदर उपचार शुरू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान आवासीय परिसरों, जैसे अनाथालयों, वृद्धाश्रमों, नारी निकेतन, बाल संरक्षण गृह, मदरसों और छात्रावासों में कैंप आयोजित कर टीबी के प्रति संवेदीकरण किया जाएगा और लक्षण युक्त व्यक्ति के स्पुटम (बलगम) के नमूने एकत्र किए जाएंगे ।  

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डीटीओ ने बताया कि अभियान के दौरान माइक्रोप्लान के मुताबिक संवेदनशील क्षेत्रों (घनी बस्ती और स्लम एरिया) को कवर करते हुए जनपद की 20 प्रतिशत आबादी की स्क्रीनिंग की जाएगी। स्क्रीनिंग में मिलने वाले लक्षण युक्त व्यक्तियों की जांच की जाएगी। जांच में टीबी की पुष्टि होने पर हर रोगी की सीबीनॉट जांच कराई जाएगी ताकि उसके लिए सटीक दवा का निर्धारण करने में आसानी हो। इसके साथ ही सभी रोगियों की शुगर और एचआईवी जांच भी की जाएगी और पूरा डेटा निक्षय पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा । 

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जनपद में क्षय रोग के मरीज – जिला कार्यक्रम समन्वयक संजय चौधरी ने बताया कि जनपद में जनवरी से अब तक 14,917 टीबी रोगी खोजे जा चुके हैं जिसमें से 5,930 रोगियों का उपचार पूरा हो चुका है। शेष 8,987 मरीजों का स्वास्थ्य विभाग द्वारा निरंतर उपचार किया जा रहा है। साथ ही गोद लिए गए सभी क्षय रोगियों को हर माह पोषण पोटली भी प्रदान की जा रही है। निक्षय पोषण योजना में क्षय रोगियों को उपचार के दौरान हर माह 500 रुपये भी डीबीटी के द्वारा भेजे जा रहे हैं।

क्षय रोग के बारे में जानें - दो सप्ताह या अधिक समय तक खांसी आना, खांसी के साथ बलगम आना, बलगम में कभी-कभी खून आना, सीने में दर्द होना, शाम को हल्का बुखार आना, वजन कम होना और भूख न लगना टीबी के सामान्य लक्षण हैं।

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इलाज के दौरान खर्च हुये व्यय को तत्काल नियमानुसार वापस किया जाए, नहीं तो मान्यता होगी रद्द

वाराणसी: आयुष्मान भारत - प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएमजेएवाई) एवं मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना (एमएमजेएवाई) के अंतर्गत सूचीबद्ध चिकित्सालय में भर्ती सभी लाभार्थियों या मरीजों को नियमानुसार निःशुल्क इलाज़ की सुविधा प्रदान की जाए। लाभार्थियों द्वारा इलाज़ के दौरान खर्च हुए व्यय को तत्काल नियमानुसार वापस किया जाए अन्यथा की स्थिति में चिकित्सालय के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही योजना में चिकित्सालय की आबद्धता निरस्त करने के लिए स्टेट एजेंसी फॉर हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज़) के उच्च अधिकारियों को सूचित करते हुए जिला स्तरीय स्थानीय पंजीकरण भी निरस्त कर दिया जाएगा। यह कहना है मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ संदीप चौधरी का। 


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सीएमओ ने शुक्रवार को सीएमओ कार्यालय में बैठक कर योजना से जुड़े चिकित्सालय में लाभार्थियों के उपचार के लिए विभिन्न दिशा निर्देश दिए। सीएमओ ने कहा – “सूचीबद्ध चिकित्सालय में आने वाले सभी रोगियों से इस आशय का सहमति पत्र अनिवार्य रूप से लिया जाए कि "रोगी आयुष्मान कार्ड धारक है अथवा नहीं"। समस्त आबद्ध चिकित्सालय द्वारा आयुष्मान भारत योजना संबंधित प्रचार-प्रसार के लिए सूचना, शिक्षा व संचार (आईईसी) सामग्री, हेल्प डेस्क, कियोस्क को अद्यतन (अपडेट) करते हुये कार्यालय में सूचित किया जाए।  बनाई गई हेल्प डेस्क पर आयुष्मान मित्र की उपस्थिति के साथ-साथ उनके व चिकित्सालय के दूरभाष नंबर को भी प्रदर्शित किया जाए। यू०पी० क्लीनिकल एस्टेबलिशमेंट (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) नियम 2016 की धारा 28 (डिस्प्ले ऑफ इन्फॉर्मेशन) का अनुपालन सुनिश्चित करते हुये चिकित्सालय परिसर में चिकित्सा इकाई का योजनांतर्गत स्पेशियलिटी रजिस्ट्रेशन नंबर, संचालक का नाम, बेड की संख्या, औषधि की पद्धति एवं चिकित्सालय द्वारा प्रदान की जा रही सेवाओं तथा चिकित्सा कर्मचारीवृद (चिकित्सक, नर्स आदि) का विवरण डिस्प्ले बोर्ड पर प्रदर्शित करें, जिसका बैकग्राउंड पीला (फॉर्मेट), हिन्दी अक्षर का रंग काला हो। डिस्प्ले बोर्ड चिकित्सालय के मुख्य द्वार के पास प्रदर्शित कराया जाए। सीएमओ ने कहा कि विगत कुछ समय से यह भी देखा जा रहा कि छह माह से पूर्व निरस्त किये गये दावों (क्लेम) को रद्द (रिवोक) किये जाने का अनुरोध किया जाता है, साचीज से प्राप्त निर्देश के क्रम में ऐसे निरस्त दावों पर नियमानुसार विचार नहीं किया जाएगा।

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अपर जिलाधिकारी (प्रोटोकॉल) की अध्यक्षता में गठित जिला शिकायत निवारण समिति (डीजीआरसी) के बैठक में प्रस्तुत किए गए दावा प्रपत्रों पर लिए गए निर्णय पर असंतुष्टि के उपरान्त उच्चस्तर पर राज्य शिकायत निवारण समिति (एसजीआरसी) के समक्ष अग्रिम अपील चिकित्सालय के द्वारा प्रस्तुत की जा सकती है। इसके लिए अधिकतम सीमा अवधि 30 दिन है। समिति के समक्ष अक्सर निम्न कमियाँ पायी जाती हैं, जिनका निवारण सरलता से करते हुए योजना का सम्पूर्ण लाभ लिया जा सकता है यथा-

  • मरीज को आईसीयू एचडीयू से ही सीधा डिस्चार्ज करना। 
  • हिस्टोपैथोलॉजी एक्जामिन (एचपीई)रिपोर्ट संलग्न न करना।
  • भर्ती व डिस्चार्ज के समय आधार बायो-औथ न करना। 
  • समयांतर्गत क्वेरीज़ अपडेट नहीं करना। 
  • एक साथ दो पैकेज सिलेक्ट करना।
  • ओ०पी०डी० के आधार पर उपचार किए जा सकने वाले केस को भी आई०पी०डी० में दिखाना। 
  • मरीज का पिछला रिकॉर्ड चेक किए बिना मिलते-जुलते पैकेज में दोबारा अल्प अवधि में ही प्री-औथराइजेशन के लिए आवेदन करना। 

इस वजह से समस्त आबद्ध चिकित्सालयों से यह अपेक्षा की जाती है कि कोई भी निरस्त क्लेम जिला तथा राज्य शिकायत निवारण समिति को रद्द करने के लिए प्रेषित करने से पूर्व उपरोक्त बिन्दुओं को ध्यान में रखा जाए।

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साथ ही सीएमओ ने कहा कि समस्त चिकित्सालयों में आंतरिक परिवाद समिति का गठन किया जाए जिस समिति की अध्यक्ष कोई वरिष्ठ महिला सदस्य नामित हो तथा अध्यक्ष सहित समिति में महिलाओं की संख्या अधिक हो। इसके अलावा चिकित्सालय के स्तर पर शिकायत समिति गठित कर लिया जाए। चिकित्सालय के मुख्य द्वार पर शिकायत पेटिका भी लगाई जाए।

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Friday, November 17, 2023

मोतियाबिंद के समस्त मरीजों का होगा निःशुल्क ऑपरेशन- सीडीओ हिमांशु नागपाल

वाराणसी: मुख्य विकास अधिकारी हिमांशु नागपाल ने बृहस्पतिवार को "स्वस्थ दृष्टि समृद्ध काशी" योजना की समीक्षा वर्चुअल बैठक के माध्यम से की। बैठक में जूम मीटिंग से शहर व ग्रामीण के सभी प्रभारी चिकित्सा अधिकारी व बीडीओ और श्री सद्गुरु सेवा संघ से "स्वस्थ दृष्टि समृद्ध काशी" परियोजना के तहत अभी तक हुए मोतियाबिंद ऑपरेशन की प्रगति रिपोर्ट की जानकारी ली गई। 


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मुख्य विकास अधिकारी ने सभी ब्लॉक के प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों को निर्देशित किया कि पूर्व से चिन्हित मोतियाबिंद के मरीजों में से प्रति सप्ताह 100 केस निःशुल्क ऑपरेशन के लिए भेजे जाएं। समीक्षा के दौरान मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी में जनहित में श्री सद्गुरु सेवा संघ द्वारा पूर्व में स्क्रीनिंग कैम्प लगा कर शहरी क्षेत्र में 5829 मोतियाबिंद के मरीजों को चिन्हित किया गया था, जिसमें से अब तक 1803 केस का निःशुल्क ऑपरेशन चित्रकूट में स्थापित अत्याधुनिक नेत्र चिकित्सालय में सुविधा जनक तरीके से ले जाकर फेको विधि से कर दिया गया है। इसी तरह से ग्रामीण क्षेत्र के भी सभी ब्लॉक से अब तक 13150 मोतियाबिंद के मरीज चिन्हित हुए है और अब तक 3959 केस का ऑपरेशन हो चुका है। 

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उन्होंने बताया कि प्रत्येक ब्लॉक से माह में दो बार मरीजों को चित्रकूट हॉस्पिटल ले जाने के लिए एसी बस की विशेष व्यवस्था किया गया है। उन्होंने सभी ग्रामीण ब्लॉक प्रभारियों कों निर्देश दिया कि प्रत्येक माह उनके ब्लॉक सीएचसी पर दो कैम्प लगाए जायेंगे और उसमे ज्यादा से मोतियाबिंद के मरीजों कों पंजीकृत कर उनका निःशुल्क ऑपरेशन कराने में सहयोग किया जाये। शहरी क्षेत्र में भी अर्बन पीएचसी मेडिकल ऑफिसर अपने वार्ड के सभासदों के साथ बैठक कर उनका सहयोग लें। ग्रामीण क्षेत्र में बीडीओ व ब्लॉक चिकित्सा अधिकारीयों को निर्देशित करते हुए कहा कि वे अपने क्षेत्र के ग्राम प्रधानों, आशा, एएनएम के साथ समन्वय स्थापित कर बैठक करें और समस्त मोतियाबिंद के मरीजों को चिन्हित करते हुए उनका निःशुल्क ऑपरेशन कराएं।

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 उन्होंने कहा कि जनहित के उक्त कार्यक्रम में किसी भी तरह लापरवाही न बरती जाये और माह दिसम्बर तक सभी छूटे हुए चिन्हित मोतियाबिंद के मरीजों का निःशुल्क ऑपरेशन कराया जाये। इस जनहित के नेक कार्य में सभी चिकित्सा प्रभारियों व बीडीओ को उन्होंने निर्देश दिया कि वह प्राथमिकता के आधार पर उक्त कार्य में सहयोग करें। बैठक में सीएमओ डॉ संदीप चौधरी, एसीएमओ व नोडल अधिकारी डॉ संजय राय, विजय सिंह सहित शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के सभी प्रभारी चिकित्सा अधिकारी व बीडीओ जुड़े रहे।

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Friday, November 10, 2023

जनपद में विशेष अभियान चलाकर बनाए जाएंगे आयुष्मान कार्ड

वाराणसी: पात्र लाभार्थियों का आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए प्रदेश भर में विशेष अभियान शुरू किया गया है जो 31 दिसम्बर तक चलेगा। अभियान के दौरान दीपावली पर घर आने वाले पात्र प्रवासियों और गृहस्थी राशन कार्ड पात्रता सूची में छह या उससे अधिक सदस्यों वाले लाभार्थी परिवारों को सेवा देने पर विशेष जोर होगा। इस सम्बन्ध में प्रमुख सचिव चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण उत्तर प्रदेश पार्थ सारथी सेन शर्मा ने वाराणसी समेत सभी जिलों को पत्र जारी कर विस्तृत दिशा निर्देश दिए हैं। पत्र के अनुसार कार्ड बनवाने में कोटेदारों और पंचायत सहायकों से भी मदद लेने के लिए कहा गया है। यह जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ संदीप चौधरी ने दी।


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सीएमओ का कहना है कि जिलाधिकारी एस राजलिंगम व मुख्य विकास अधिकारी हिमांशु नागपाल के नेतृत्व व निर्देशन में इस बारे में आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान के तहत आयुष्मान कार्ड धारक प्रति लाभार्थी परिवार को पांच लाख रुपये तक के इलाज की सुविधा दी जाती है। कार्डधारकों को देश के किसी भी सम्बद्ध सरकारी और निजी अस्पताल में भर्ती होने के बाद यह सुविधा बिना समय गवाएं मिलती है। इस योजना से हाल ही में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम की पात्र गृहस्थी राशन कार्ड पात्रता सूची में छह या उससे अधिक सदस्यों वाले परिवारों को भी जोड़ा गया है। ऐसे परिवारों को भी योजना में शामिल किया गया है जिनमें केवल वरिष्ठ नागरिक ही सदस्य हैं और पात्र गृहस्थी राशन कार्ड के भी लाभार्थी हैं। ऐसे नये सदस्यों का कार्ड बनाने पर अधिक जोर है।

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प्रमुख सचिव के पत्र के अनुसार विशेष अभियान के दौरान प्रदेश के सभी ग्राम पंचायतों और शहरी वार्डों में आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए कैम्प लगाये जाएंगे। कैम्प के एक दिन पहले योजना के लाभार्थियों को आशा कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के जरिये आयोजन स्थल की सूचना दी जाएगी। ग्राम पंचायतों में प्रचार-प्रसार के लिए माईकिंग का भी उपयोग किया जायेगा। प्रत्येक ब्लॉक के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी इस अभियान के नोडल अधिकारी होंगे और वह एक नोडल टीम गठित करेंगे जो कार्ययोजना को पूरा कराएगी। अभियान की सफलता के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों और स्वयंसेवी संस्थाओं का भी सहयोग लेने के लिए कहा गया है । प्रमुख सचिव ने इस अभियान में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित करने का भी निर्देश दिया है।

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आयुष्मान एप का करें प्रचार – सीएमओ ने बताया कि प्रमुख सचिव ने निर्देश है कि लोगों के बीच आयुष्मान एप की मदद से खुद आयुष्मान कार्ड बनाने के तरीकों के बारे में प्रचार प्रसार करें। जन औषधि केंद्रों और समाचार पत्रों के माध्यम से क्यू आर कोड का प्रदर्शन किया जाए जिसे स्कैन कर लोग अपने मोबाइल में आयुष्मान एप के इस्तेमाल के तरीके का वीडियो देख सकें और खुद अपना कार्ड बना सकें।

2.5 करोड़ लाभार्थियों का बनना है कार्ड - प्रमुख सचिव के पत्र के अनुसार पात्र गृहस्थी राशन कार्ड पात्रता सूची में प्रदेश के छह या उससे अधिक सदस्यों वाले 49.74 लाख परिवारों और सभी वरिष्ठ सदस्यों वाले 11.74 लाख परिवारों को योजना में शामिल किया गया है। पात्र गृहस्थी राशन कार्ड वाले 3.48 करोड़ पात्र लाभार्थियों में से केवल एक करोड़ लाभार्थियों का ही आयुष्मान कार्ड अभी तक बनाया जा सका है। अभियान के जरिये 2.5 करोड़ अन्य लाभार्थियों का कार्ड बनाने पर विशेष जोर होगा।

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वाराणसी की स्थिति - जनपद में आयुष्मान भारत योजना के नोडल अधिकारी डॉ आरके सिंह ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत 12.82 लाख लाभार्थियों के सापेक्ष अबतक 9,38,332 लाख लाभार्थियों के कार्ड बने हैं। अब तक 1,97,238 परिवार कवर किए जा चुके हैं। प्रमुख सचिव से प्राप्त पत्र में मिले दिशा निर्देशों के अनुसार विशेष अभियान के जनपद स्तरीय माइक्रोप्लानिंग की जिम्मेदारी ब्लॉक स्तर को दी गई है। डीआईएसएम नवेन्द्र सिंह ने बताया कि 17 सितंबर से आयुष्मान आपके द्वार 3.0 शुरू किया गया था। तब से लेकर पिछले ढाई माह में करीब 3.4 लाख से अधिक कार्ड बनाए गए हैं। अब तक दो लाख से अधिक लाभार्थियों का इलाज योजना के तहत किया जा चुका है।

Tuesday, November 7, 2023

दीपावली, छठ पर्व, देव दीपावली समेत अन्य त्यौहारों को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

वाराणसी: दीपोत्सव, दीपावली, भाई दूज, छठ पर्व एवं देव दीपावली के सफलता पूर्वक आयोजन के लिए जनपद प्रशासन ज़ोरों से तैयारिया पूर्ण करने में जुटा है। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने भी आकस्मिक स्थिति में चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए जनपद स्तरीय सरकारी चिकित्सालयों को  निर्देशित किया है। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ संदीप चौधरी ने मंगलवार को मंडलीय चिकित्सालय और राजकीय चिकिस्तालयों के अधीक्षकों के साथ वर्चुअल बैठक की।


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सीएमओ ने कहा कि इन त्यौहारों की अवधि के दौरान वायु प्रदूषण बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में श्वास के रोगियों के लिए उपचार की भी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि अभी भी संचारी रोगों के प्रकरण आ रहे हैं, ऐसे में संचारी रोगों के नियंत्रण के लिए पूर्व में दिये गये दिशा-निर्देशों के आधार पर प्रभावी कार्यवाही अन्तर्विभागीय समन्वय, जन सहभागिता, प्रतिरक्षण, सर्विलांस और केस बेस्ड एक्टिविटी के आधार पर समस्त चिकित्सा व स्वास्थ्य व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। विभिन्न संचारी व संक्रामक रोगों के बचाव के उपायों एवं उपरोक्त त्यौहारों को सुरक्षित रूप से मनाये जाने के संबंध में विभिन्न माध्यमों- जैसे सोशल मीडिया, प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिये व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।

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प्रमुख सचिव स्वास्थ्य उत्तर प्रदेश की ओर से मिले निर्देश के क्रम में सीएमओ ने कहा कि सभी चिकित्सालयों में आकस्मिक सेवाएं सुचारू रूप से चौबीस घंटे संचालित रहें एवं पर्याप्त संख्या में चिकित्सक एवं स्टाफ की ड्यूटी आकस्मिक सेवाओं में लगायी जाए। विशेष रूप से पटाखों की वजह से बर्न (झुलसने) के केस, शराब के सेवन की वजह से सड़क दुर्घटना के केस, फूड पॉइजनिंग एवं आई (आंख) इन्जुरी के केस इत्यादि आ सकते हैं ऐसे प्रकरणों के लिए समुचित उपचार इत्यादि की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। 

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इसके साथ ही श्वांस एवं बर्न के रोगियों के लिए बेड आरक्षित रखे जाएं। सभी जाँच एवं पैथोलॉजी के आवश्यक उपकरण क्रियाशील रखे जाएं। साथ ही 108, 102 व एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) एंबुलेंस सेवा के प्रोग्राम मैनेजर को निर्देशित किया कि किसी भी आकस्मिक स्थिति में एम्बुलेंस की ससमय उपलब्धता सुनिश्चित कराएं । समस्त चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ को त्यौहारों के दिनों में अपरिहार्य कारणों के अलावा अवकाश स्वीकृत न किया जाये। जिला प्रशासन से पूर्ण समन्वय रखकर आवश्यक कार्रवाई की जाए। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों (सीएचसी) पर चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। सभी चिकित्सक इकाइयों पर परस्पर समन्वय बनाये रखेंगी, जिससे रेफर अप एवं रेफर डाउन सुचारू रूप से किया जा सके।

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सीएमओ ने समस्त सरकारी चिकित्सालयों में पर्याप्त मात्रा में औषधियों एवं आवश्यक उपकरणों की क्रियाशीलता को पूर्व से ही सुनिश्चित करने को कहा। इमरजेंसी ड्यूटी में लगे चिकित्सकों एवं पैरामेडिकल स्टाफ को निर्देशित किया कि वह निर्धारित ड्रेस कोड एवं समयानुसार चिकित्सालय में उपस्थित रहकर चिकित्सकीय कार्य करना सुनिश्चित करें, जिससे किसी भी आकस्मिकता के दृष्टिगत कोई विपरीत स्थिति न उत्पन्न हो।

Monday, November 6, 2023

फाइलेरिया के 20 रोगियों को प्रदान की गई एमएमडीपी किट

वाराणसी: राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत नगरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मिसिरपुर (काशी विद्यापीठ) पर सोमवार को फाइलेरिया (हाथी पांव) से ग्रसित 20 रोगियों को रुग्णता प्रबंधन व दिव्यांग्ता रोकथाम (एमएमडीपी) किट और आवश्यक दवा प्रदान की गई। इसके साथ ही रोगियों को प्रभावित अंगों व घाव की नियमित साफ-सफाई के तरीके बताए गए। इसके अलावा सभी रोगियों खासकर ग्रेड 6 यानि गंभीर फाइलेरिया वाले रोगियों को चौकाघाट स्थित राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज के तीसरे तल्ले पर संचालित फाइलेरिया आईएडी उपचार केंद्र के लिए संदर्भित भी किया गया। 


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इस मौके पर जिला मलेरिया अधिकारी (डीएमओ) शरत चंद पाण्डेय ने सभी रोगियों को  एमएमडीपी किट प्रदान की। साथ ही उन्होंने फाइलेरिया के सभी रोगियों को साफ-सफाई, देखभाल, दिव्यांग्ता रोकथाम एवं सामान्य व्यायाम के बारे में प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि फाइलेरिया ग्रस्त अंगों मुख्यतः पैर की साफ-सफाई रखने से इंफेक्शन का डर नहीं रहता है और सूजन में भी कमी रहती है। इसके प्रति लापरवाही बरतने पर अंग खराब होने लगते हैं। इससे समस्या बढ़ जाती है। इन्फेक्शन को बढ़ने से रोकने के लिए दवा भी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि जिनके हाथ-पैर में सूजन आ गई है या फिर उनके फाइलेरिया ग्रस्त अंगों से पानी का रिसाव होता है। इस स्थिति में उनके प्रभावित अंगों की साफ-सफाई बेहद आवश्यक है। इसलिए एमएमडीपी किट प्रदान की जा रही है। इस किट में एक-एक टब, मग, बाल्टी तौलिया, साबुन, एंटी फंगल क्रीम आदि शामिल हैं। फाइलेरिया रोगी सहायता समूह (पीएसजी) नेटवर्क के सदस्य समुदाय को फाइलेरिया के प्रति जागरूक कर रहे हैं। साथ ही बीमारी से जुड़े मिथक को भी दूर कर रहे हैं। 

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इस दौरान जिला मलेरिया अधिकारी ने सभी आशा कार्यकर्ताओं और संगिनी को फाइलेरिया (हाथ-पैरों में सूजन और अंडकोषों में सूजन) के कारण, लक्षण, पहचान, जांच, उपचार व बचाव आदि के बारे में विस्तार से बताया। इस मौके पर स्वास्थ्य पर्यवेक्षक अवनिन्द्र मणि, आशा कार्यकर्ता एवं अन्य लोग उपस्थित रहे।

लाभार्थियों के बोल – रामकिशुन (55) ने बताया कि फाइलेरिया से प्रभावित अपने पैर की देखभाल व साफ-सफाई के बारे में जानकारी दी गई। इसके अलावा बैठे-बैठे सामान्य व्यायाम के बारे में भी जानकारी मिली, जिसका वह नियमित रूप से पालन करेंगे। चम्पा देवी (72) ने बताया कि इससे पहले हाथीपांव के बारे में इतना नहीं पता था। डॉक्टर द्वारा दी गई जानकारियों का वह नियमित रूप से पालन करेंगी।   

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फाइलेरिया क्या है – फाइलेरिया, मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होने वाला एक संक्रामक रोग है जिसे समान्यतः हाथीपांव के नाम से जाना जाता है। इसका मच्छर रुके हुये पानी में पनपता है। संक्रमित व्यक्ति को काटकर मच्छर संक्रमित हो जाते हैं। संक्रमित मच्छर स्वस्थ व्यक्ति को काटकर संक्रमित कर देते हैं। इससे हाथीपांव व हाइड्रोसिल का खतरा रहता है।   

लक्षण – 

  • सामान्यतः इसके कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। 
  • बुखार, हाथ, पैर में दर्द या सूजन तथा पुरुषों के जननांग में व उसके आसपास दर्द या सूजन
  • पैरों व हाथों में सूजन और हाइड्रोसिल (अंडकोषों में सूजन)

रोकथाम व बचाव – 

  • सोते समय मच्छर दानी का प्रयोग करें। 
  • घर व आसपास साफ-सफाई रखें।

‘सांस’ कार्यक्रम - नवजात शिशुओं व बच्चों को निमोनिया से दिलाएगा छुटकारा

वाराणसी: मातृ व शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए सरकार द्वारा विभिन्न योजनायें व कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में जन्म से लेकर पाँच वर्ष तक के बच्चों को निमोनिया से बचाव एवं उससे होने वाली मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से ‘सांस’ यानि ‘सोशल अवेयरनेस एंड एक्शन टू न्यूट्रलाइज़ निमोनिया सक्सेसफुली’ कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इस संबंध में सोमवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय सभागार में प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हुआ।


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सीएमओ डॉ संदीप चौधरी की अध्यक्षता में संचालित प्रशिक्षण में शहरी व ग्रामीण स्तरीय स्वास्थ्य केन्द्रों के चिकित्सकों और स्टाफ नर्स को सांस कार्यक्रम के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। सीएमओ ने कहा कि एस.आर.एस. 2020 के अनुसार देश में पाँच वर्ष तक के बच्चों की मृत्यु दर 32 प्रति 1000 जीवित जन्म है, जबकि प्रदेश में शिशु मृत्यु दर 43 प्रति 1000 जीवित जन्म है। नेशनल हेल्थ पॉलिसी वर्ष 2017 के लक्ष्य के अनुसार पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर को वर्ष 2025 तक 23 प्रति 1000 जीवित जन्म तक कम करना है। इसकी समय से पहचान एवं उचित इलाज से ही शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सकता है।

सीएमओ ने कहा कि आने वाली सर्दी के दृष्टिगत व जन जागरूकता के लिए हर साल 12 नवंबर को विश्व निमोनिया दिवस मनाया जाता है। समुदाय में को जागरूक करने के लिए यह कार्य लगातार जारी है। समस्त ओपीडी (बाह्य रोगी विभाग), आईपीडी (अन्तः रोगी विभाग), पीडियाट्रिक वार्ड व जनरल वार्ड आदि में निमोनिया का ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल उपलब्ध कराया जाए। इसके अलावा आशा कार्यकर्ता के पास आवश्यक दवा उपलब्ध रहे। प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों (पीएचसी व सीएचसी) पर पल्स-ऑक्सीमीटर द्वारा बच्चों के रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा का पता लगाया जाएगा तथा आवश्यकता पड़ने पर ऑक्सीजन सिलिंडर के प्रयोग से इनका उपचार किया जाएगा। इसके लक्षण दिखने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर डॉक्टर से परामर्श लें। उन्होंने कहा कि सही समय पर निमोनिया की पहचान कर इसका उपचार कराना सबसे ज्यादा जरूरी है। इसके लिए चिकित्सकों, स्टाफ नर्स, आशा, एएनएम व कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) को प्रशिक्षित किया जा रहा है।

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छह दिन चला प्रशिक्षण अब स्वास्थ्यकर्मियों को करेंगे प्रशिक्षित - डिप्टी सीएमओ व कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ एचसी मौर्य ने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 26 अक्टूबर से छह नवंबर के बीच छह दिन चला, जिसमें कुल 100 चिकित्सकों व स्टाफ नर्स को मास्टर ट्रेनर डॉ अजीत, डॉ करन व डॉ वरुण के द्वारा प्रशिक्षित किया गया। प्रशिक्षण में निमोनिया के कारण, लक्षण, पहचान, उपचार व प्रबंधन के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके सभी चिकित्सक व स्टाफ नर्स अब एएनएम, आशा कार्यकर्ता और सीएचओ को प्रशिक्षित करेंगे।

समय पर लगवाएँ पीसीवी टीका – डॉ मौर्य ने बताया कि इसके साथ ही छह सप्ताह के शिशुओं को पीसीवी की पहली डोज़, 14वें सप्ताह पर दूसरी डोज़ और नौ माह पूर्ण होने पर तीसरी डोज़ सभी सरकारी स्वास्थ्य इकाइयों में लगाई जा रही है। संस्थागत प्रसव के दौरान शिशु के जन्म पर माँ का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलेस्ट्रम) पिलाने के लिए प्रेरित करें। जन्म से लेकर छह माह तक सिर्फ स्तनपान कराने के फायदे के बारे में माँ को जानकारी दें। साथ ही नौ से 12 माह पर, 16 से 24 माह पर और दो से पाँच वर्ष के बच्चों को छह-छह माह के अंतराल पर विटामिन ए की खुराक पिलाएँ। इसके अलावा जन्म से लेकर पाँच वर्ष तक के बच्चों को उम्र के अनुसार सभी टीके जरूर लगवाएँ। 

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निमोनिया के लक्षण – 

  • खांसी और जुकाम का बढ़ना
  • तेजी से सांस लेना
  • सांस लेते समय पसली चलना या छाती का नीचे धंसना
  • कंपकंपी व तेज बुखार आना

गंभीर लक्षण – 

  • कुछ भी खा – पी न पाना
  • झटके आना
  • सुस्ती या अधिक नींद

निमोनिया से बचाव – 

  • सर्दियों के दौरान बच्चों को गर्म व सामान्य तापमान में रखें।
  • छह माह तक सिर्फ स्तनपान कराएं। 
  • संतुलित व स्वस्थ आहार
  • अच्छे से हाथ धोएँ

विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान के तहत चलाया गया ‘दस्तक अभियान’

वाराणसी: जनपद में विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान के तहत दस्तक अभियान 16 से 31 अक्टूबर तक चलाया गया। इस अभियान में आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने ग्रामीण व शहरी क्षेत्र में घर-घर भ्रमण कर संचारी रोग - डेंगू, मलेरिया, दिमागी बुखार आदि के साथ ही क्षय रोग (टीबी), कुष्ठ (लेप्रोसी), कालाजार एवं फाइलेरिया के लक्षणयुक्त व्यक्तियों को चिन्हित किया। साथ ही उन्हें जांच के लिए भी संदर्भित किया। 


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मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. संदीप चौधरी ने बताया कि इस अभियान में खोजे गए संचारी रोग के लक्षणयुक्त व्यक्तियों को जांच और उपचार के लिए स्वास्थ्य केन्द्रों पर संदर्भित किया गया है। आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा ली गयी सभी जानकारी ई- कवच पर अपलोड की गयी। आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओ ने घर- घर जाकर समुदाय को डेंगू, मलेरिया, कालाजार, फाइलेरिया, आदि मच्छर जनित व संचारी रोगों से बचाव के लिए बेहतर व्यवहार को अपनाने के लिए जागरूक किया गया और अभी भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अपने घरों के आसपास साफ-सफाई रखें, जलजमाव न होने दें, जलजमाव वाले पात्रों को नष्ट कर दें, मच्छरदानी का प्रयोग करें और पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें।


वेक्टर बोर्न डिजीज कार्यक्रम के नोडल अधिकारी व एसीएमओ डॉ एसएस कनौजिया ने बताया कि दस्तक अभियान में संचारी रोग - डेंगू, मलेरिया, दिमागी बुखार आदि के साथ ही क्षय रोग (टीबी) कुष्ठ (लेप्रोसी), कालाजार एवं फाइलेरिया के लक्षणयुक्त व्यक्तियों को भी चिन्हित किया गया। इसके तहत अब तक जनपद में आशा कार्यकर्ताओं के द्वारा 6.91 लाख से अधिक घरों में सर्वेक्षण किया गया। इनमें बुखार, आई एल आई (इनफ्लुएंजा लाइक इलनेस) रोगियों, क्षय रोग, कुष्ठ रोग तथा फाइलेरिया एवं कालाजार के लक्षणयुक्त व्यक्तियों की सूची भी शामिल है। इसके अलावा क्षेत्रवार ऐसे मकानों की सूची जहां घरों के भीतर मच्छरों का प्रजनन पाया गया, वहां की सूची तैयार कर आशा कार्यकर्ताओं द्वारा एएनएम को उपलब्ध करायी गयी।


जिला मलेरिया अधिकारी (डीएमओ) शरत चंद पाण्डेय ने बताया कि घर-घर दस्तक अभियान के तहत अब तक जनपद में 1946 व्यक्तियों में बुखार के लक्षण पाये गए। रेपिड जांच में दो मलेरिया के रोगी पाये गए। भ्रमण के दौरान सर्दी, खांसी, जुकाम (आईएलआई) के लक्षण वाले 262 मरीज पाये गए। सात व्यक्तियों में संभावित क्षय रोग के लक्षण पाये गए, जिनके सैंपल जांच के लिए भेजे गए। इसी तरह फाइलेरिया के लक्षण युक्त व्यक्तियों की संख्या 15, कालाजार के 89 तथा कुष्ठ रोग के लक्षण युक्त व्यक्तियों की संख्या 3 है जिन्हें जांच कराने के लिए संदर्भित किया गया है। 

डेंगू मरीजों में आई गिरावट - डीएमओ ने बताया कि इस वर्ष अबतक 345 मरीज डेंगू एलाइजा की पुष्टि हुई है। इस वर्ष जुलाई में एक भी डेंगू का मरीज नहीं मिला। अगस्त में 69, सितंबर में 93, अक्टूबर में 162 और नवंबर में अब तक 21 डेंगू के मरीज पाये गए। इसके अलावा वर्ष 2022 में 562, वर्ष 2021 में 458, वर्ष 2020 में 13, वर्ष 2019 में 522, वर्ष 2018 में 881 एवं वर्ष 2017 में 722 पाये गए। इस तरह देखा जाए तो पिछले सालों में डेंगू के मरीजों में गिरावट आई है।

Friday, November 3, 2023

गंभीर फाइलेरिया रोगियों के आयुर्वेद उपचार के लिए वरदान बना आईएडी केंद्र

वाराणसी: गंभीर फाइलेरिया (हाथीपाँव) रोगियों के आयुर्वेदिक थेरेपी, ऐलोपैथ व योगा पद्धति से हो रहा उपचार उनके लिए वरदान साबित हो रहा है। खास बात यह है कि बिना किसी सर्जिकल प्रक्रिया से इसका उपचार संभव हो पा रहा है। फाइलेरिया मुक्त भारत की दिशा में चौकाघाट स्थित राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं चिकित्सालय में इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड डर्मेटोलॉजी (आईएडी) फाइलेरिया एकीकृत उपचार केंद्र अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। यहाँ मौजूद आयुर्वेद और योगा पद्धति, हाथीपांव ग्रसित गंभीर रोगियों के सम्पूर्ण उपचार में मददगार साबित हो रही है और उन्हें सामान्य जीवन की ओर भी ले जा रही है। यह कहना है मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ संदीप चौधरी का।



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वह बृहस्पतिवार को उपचार केंद्र में भ्रमण करने पहुँचें और उन्होंने यहाँ की समस्त सुविधाओं, स्टाफ समेत फाइलेरिया रोगियों से भी बातचीत की। उनके साथ एसीएमओ डॉ एसएस कनौजिया और बायोलोजिस्ट डॉ अमित कुमार सिंह भी मौजूद रहे। सीएमओ ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार व आयुष मंत्रालय की पहल पर फाइलेरिया एकीकृत उपचार केंद्र का संचालन आईएडी, केरल द्वारा एवं बिल एंड मिलिंडा गेट्स फ़ाउंडेशन (बीएमजीएफ़) के वित्तीय सहयोग से किया जा रहा है। केंद्र की शुरुआत इसी साल 15 मार्च से हुई थी। तब से लेकर अब तक यहाँ 120 गंभीर फाइलेरिया रोगियों को भर्ती किया जा चुका है। इसमें से 113 रोगियों का उपचार पूरा हो चुका है जबकि सात रोगियों का उपचार चल रहा है। केंद्र पर रोगियों के उपचार के लिए चिकित्सक सहित आठ स्वास्थ्यकर्मियों का स्टाफ तैनात है। इसमें एक आयुर्वेद चिकित्सक, दो एलोपैथी नर्स, एक योगा थेरेपिस्ट, चार मल्टीपर्पस पैरामेडिकल स्टाफ और एक तकनीकी समन्वयक शामिल हैं। वर्तमान में केंद्र पर महिला व पुरुष के लिए 13 बेड का वार्ड तैयार हैं। 

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सीएमओ ने सभी ब्लॉक स्तरीय स्वास्थ्य केन्द्रों के अधीक्षक व प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि गंभीर (ग्रेड थ्री से ऊपर) फाइलेरिया रोगियों को आईएडी फाइलेरिया एकीकृत उपचार केंद्र पर संदर्भित करना जल्द सुनिश्चित करें। उन्होंने बताया कि आईएडी के निदेशक डॉ एसआर नरहरी के निर्देशन में यह केंद्र बेहतर सुविधाएं रोगियों को प्रदान कर रहा है। 

लाभार्थियों की कहानी उन्हीं की जुबानी – 

केस-1 जौनपुर के रहने वाले 70 वर्षीय मंजीत उपाध्याय पिछले 10 सालों से फाइलेरिया से ग्रसित हैं। काफी दिनों से वह ऐलोपेथिक उपचार करवा रहे थे लेकिन कोई आराम नहीं था। धीरे-धीरे पैरों की हालत गंभीर हो रही थी। वह इसको ठीक कराने में हार मान चुके थे। इस साल अप्रैल में उनके ही जानने वाले एक फाइलेरिया रोगी जो यहाँ से ठीक होकर गए थे, उनसे मुलाक़ात हुई। बातचीत होने के बाद उन्होंने इसी केंद्र में उपचार शुरू कराया। भर्ती के समय ग्रेड 4 (आईएसएल-3) से लेकर सूजन आदि में 31 प्रतिशत की कमी आई है। उपचार व फॉलो अप पूरा हो चुका है। अब वह घर पर रहकर विशेष देखभाल कर रहे हैं। जिससे वह धीरे-धीरे ठीक हो रहे हैं। घर में किसी को भी यह बीमारी नहीं है। 

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केस-2 ऐसे ही प्रयागराज से आए 47 वर्षीय रमेश (काल्पनिक नाम) करीब 23 साल से फाइलेरिया के रोग से ग्रसित हैं। पिछले चार-पाँच सालों से अपने दोनों पैरों में अधिक सूजन व घाव से काफी परेशान हैं। लेकिन उनकी इस परेशानी को दूर करने में आईएडी केंद्र और प्रयागराज के जिला मलेरिया अधिकारी डॉ आनंद सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्हीं की मदद से वह अपने ग्रेड 7 (आईएसएल-3) का उपचार दो अगस्त से केंद्र पर करा रहे हैं। सीएमओ की उपस्थिती में भर्ती के समय उनका वजन करीब दो सौ किलोग्राम था और चलने में भी असमर्थ थे। लेकिन केंद्र पर मिल रहे उपचार के दौरान उनका पैर 50 फीसदी तक ठीक हो चुका है। साथ ही उनके जीवन स्तर में 70 फीसदी सुधार हुआ है जिससे वह और उनके परिवार वाले काफी खुश हैं।

यह है सुविधाएं – केंद्र पर विभिन्न आयुर्वेदिक थेरेपी, एलोपैथ, योगा की एकीकृत पद्धति व आहार परामर्श से भर्ती रोगियों का सात, 14 व 21 दिन तक उपचार किया जा रहा है। इसके साथ ही भर्ती रोगियों के ठहरने और खाने की व्यवस्था प्रदान की जा रही है। उपचार पूरा होने के बाद रोगी का तीन माह तक फॉलो-अप किया जाता है। इस एक दिवसीय फॉलो अप में रोगी की पुनः सम्पूर्ण मेजरमेंट, आयुर्वेदिक थेरेपी, योगा, मसाज तथा आहार परामर्श से उपचार किया जाएगा। सरकार का प्रयास है कि रोगी को जल्द से जल्द हाथीपाँव से छुटकारा दिया जाए। 

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रोज़ होती है सम्पूर्ण उपचार प्रक्रिया – भर्ती फाइलेरिया (हाथी पाँव) रोगियों की प्रतिदिन समय के अनुसार सम्पूर्ण उपचार प्रक्रिया होती है। इसमें रोगी की मेजरमेंट, साफ-सफाई, आयुर्वेदिक थेरेपी फांटा सोकिंग (घोल प्रक्रिया), योगा, कंप्रेशन और अंत में पुनः योगा व मसाज प्रतिदिन की जाती है। 

यहाँ कर सकते हैं संपर्क – फाइलेरिया (हाथी पाँव) संबंधी स्क्रीनिंग, उपचार आदि के लिए चौकाघाट स्थित फाइलेरिया एकीकृत उपचार केंद्र वाराणसी के हेल्पलाइन नंबर 9567283334 पर प्रत्येक दिन सुबह नौ से सायं पाँच बजे तक संपर्क किया जा सकता है।

Thursday, November 2, 2023

जनपद में शुरू हुआ स्कूल आधारित विशेष टीकाकरण अभियान, 10 नवंबर तक चलेगा

वाराणसी: बच्चों को टिटनेस – डिप्थीरिया (टीडी) और डिप्थीरिया (गलघोंटू)-पर्ट्यूसिस (काली खांसी) और टिटनेस (डीपीटी) से बचाव के लिए बृहस्पतिवार को जनपद के सरकारी व निजी क्षेत्र के स्कूलों, विद्यालयों में विशेष टीकाकरण अभियान चलाया गया। इस दौरान बच्चों में काफी उत्साह भी देखने को मिला। साथ ही बच्चों में टीका लगवाने  की उत्सुकता भी दिखी। बृहस्पतिवार को लंका स्थित तुलसी निकेतन स्कूल व संकट मोचन स्थित भोगावीर महामना मदन मोहन स्कूल सहित विभिन्न स्कूलों में पाँच वर्ष से 16 वर्ष तक के बच्चों को टीका लगाया गया।


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मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ संदीप चौधरी ने बताया कि डिप्थीरिया की रोकथाम व बचाव के लिए स्कूल जाने वाले बच्चों को डीपीटी व टीडी का टीका लगाने का विशेष अभियान शुरू हुआ है, जो 10 नवंबर तक जनपद के समस्त सरकारी व निजी क्षेत्र के स्कूलों में चलेगा। स्कूल आधारित यह विशेष टीकाकरण अभियान बुधवार एवं शनिवार को छोड़कर समस्त राजकीय एवं निजी स्कूलों में आयोजित किया जायेगा। उन्होंने बताया कि कक्षा एक में अध्ययनरत पाँच वर्ष तक के बच्चों को डीपीटी बूस्टर डोज, कक्षा पाँच में अध्ययनरत 10 वर्ष तक के बच्चों को टीडी डोज़, कक्षा 10 में अध्ययनरत 16 वर्ष तक के बच्चों को टीडी डोज़ से आच्छादित किया जा रहा है। अभियान के दौरान पड़ने वाले नियमित टीकाकरण दिवसों (बुधवार व शनिवार) में सभी स्कूल न जाने वाले एवं अन्य डीपीटी बूस्टर, टीडी एवं टीडी बूस्टर डोज़ वैक्सीन से छूटे हुये बच्चों को ड्यू टीके से आच्छादित किया जायेगा।

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अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (प्रतिरक्षण) डॉ एके मौर्या ने बताया कि इस विशेष टीकाकरण अभियान के तहत जनपद के 1907 स्कूलों को कवर किया जा रहा है। इसमें कक्षा एक में अध्ययनरत पाँच वर्ष के 96052 बच्चे, कक्षा पाँच में अध्ययनरत दस से 11 वर्ष के 103748 बच्चे और कक्षा 10 में अध्ययनरत 15 से 16 वर्ष के 25853 बच्चे शामिल हैं। इस तरह देखा जाए तो इस अभियान में करीब 2.25 लाख बच्चों को आच्छादित किया जा रहा है। नगर के करीब 472 स्कूलों में लगभग 1.18 लाख बच्चों को कवर किया जा रहा है। इसके लिए विभिन्न स्कूलों में करीब 1561 सत्र भी निर्धारित किए गए हैं जहां उन्हें उम्र के अनुसार डीपीटी बूस्टर, टीडी और टीडी बूस्टर डोज़ लगाई जा रही है।

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लाभार्थी बच्चों के बोल – तुलसी निकेतन स्कूल के पाँचवीं कक्षा के प्रत्युष पाठक ने कहा “आज मैंने मम्मी-पापा की सहमति से स्कूल में ही टीडी का टीका लगवाया है। इसमें मुझे कोई डर नहीं लगा। सुई लगते समय बस थोड़ी सी झनझनाहट सी हुई थी, लेकिन उसके थोड़ी देर बाद वह भी सही हो गई”। पाँचवीं की ही अनन्या मिश्रा ने कहा “मैंने घर वालों की अनुमति से टीडी का टीका लगवाया है। यह पूरी तरह से सुरक्षित है। इसमें मुझे कोई दिक्कत नहीं हुई। ऐसे ही रिया तिवारी, याशिका व भोगावीर महामना स्कूल में पाँचवीं के आर्यन, शैलू, आस्था, काजल, अंजली ने भी टीडी का टीका लगवाया। इस दौरान एएनएम अंतिमा व मिंता, आशा अंजली श्रीवास्तव, शिक्षक रीता राय, रितु शर्मा, सुमिता ठाकुर व अंजु तिवारी, डबल्यूएचओ से सतरूपा ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।     

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बच्चों को डिप्थीरिया व टीडी का टीका जरूर लगवाएं – एसीएमओ डॉ एके मौर्य ने बताया कि डिप्थीरिया छोटे बच्चों का एक संक्रामक रोग है। यह अक्सर दो वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक की आयु के बच्चों में अधिक होता है। यह बीमारी कॉरीनेबैक्टेरियम डिप्थीरिया नामक बैक्टीरिया के संक्रमण से होती है। यह बीमारी अक्सर बच्चों की पेंसिल, लेखनी आदि वस्तुओं को मुंह में रखने और बलगम से दूसरे लोगों में फैलती है। यह बैक्टीरिया टॉन्सिल व श्वांस नली को संक्रमित करता है। संक्रमण से झिल्ली बन जाती है जिससे सांस लेने में रुकावट पैदा होती है। कुछ मामलों में यह गंभीर स्थिति में पहुँच जाती है। उन्होंने बताया कि ऐसा देखा गया है कि टीकाकरण के बाद कुछ बच्चों में बुखार और इंजेक्शन वाली जगह पर लालिमा या सूजन की दिक्कत हो सकती है। यह सामान्य प्रतिक्रिया है और इससे घबराने की आवश्यकता नहीं है। ऐसा होने पर एएनएम से सलाह अवश्य लें।

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