वाराणसी: विकास खंड चिरईगांव में इन दिनों एक सवाल तेजी से चर्चा में है पांच साल में किसने ज्यादा काम किया और किसके हिस्से में सिर्फ वादे आए? एक तरफ शिवपुर विधानसभा से कैबिनेट मंत्री एवं विधायक अनिल राजभर हैं, जिनके बड़े-बड़े विकास वादों को लेकर स्थानीय लोगों की उम्मीदें जुड़ी रहीं। दूसरी तरफ ब्लॉक प्रमुख अभिषेक कुमार सिंह हैं, जिनके कार्यकाल में विकास खंड परिसर से लेकर स्थानीय सुविधाओं तक कई कार्य कराए जाने का दावा किया जा रहा है।
अब सवाल यह है कि घोषणाओं और धरातल पर हुए काम के बीच आखिर कितना फासला है? कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र को मिनी ट्रॉमा सेंटर बनाने का वादा साल बीते कई सालों से किया हुआ है लेकिन अभी तक इंतजार खत्म नहीं हुआ। इसीलिए चिरईगांव प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को मिनी ट्रॉमा सेंटर बनाए जाने का मुद्दा सबसे ज्यादा चर्चा में है।
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स्थानीय लोगों के अनुसार, कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने विधायक बनने के बाद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का दौरा किया था। उस दौरान इसे मिनी ट्रॉमा सेंटर बनाने की बात कही थी। बताया जाता है कि इसके बाद के दौरों में भी इस घोषणा को दोहराया गया। लेकिन सवाल वहीं खड़ा है कि घोषणा के बाद हुआ क्या?
आपको बता दें कि दूसरा कार्यकाल भी समाप्ति की ओर है, लेकिन स्थानीय स्तर पर लोगों का कहना है कि प्रस्तावित मिनी ट्रॉमा सेंटर का निर्माण अब तक जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा है। यही वह बिंदु है जहां जनता के बीच सवाल उठता है कि अगर घोषणा इतनी महत्वपूर्ण थी तो वर्षों बाद भी काम शुरू क्यों नहीं हुआ?
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मंत्री का बड़ा वादा नहीं, ब्लॉक प्रमुख का छोटा काम दिखा
विडंबना देखिए जिस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को मिनी ट्रॉमा सेंटर बनाने की बात कही गई थी, उसी परिसर में मरीजों और अस्पताल कर्मचारियों की सुविधा के लिए इंटरलॉकिंग का कार्य ब्लॉक प्रमुख अभिषेक कुमार सिंह की ओर से कराया गया।यानी एक तरफ मिनी ट्रॉमा सेंटर जैसी बड़ी घोषणा का इंतजार, तो दूसरी तरफ उसी स्वास्थ्य केंद्र में आने-जाने की बुनियादी सुविधा को दुरुस्त करने का काम। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल परिसर में रास्ते की स्थिति सुधरने से मरीजों, कर्मचारियों और अधिकारियों को सुविधा मिली है।
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बैठक कक्ष के पंखे भी बने सियासत का आईना
चिरईगांव विकास खंड के बैठक कक्ष में पंखे लगवाने का मामला भी अब चर्चा में है। बताया जा रहा है कि बैठक कक्ष में पंखे लगवाने का आश्वासन कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर की ओर से दिया गया था। लेकिन स्थानीय दावे के मुताबिक, यह काम भी अंततः ब्लॉक प्रमुख अभिषेक कुमार सिंह द्वारा कराया गया। यहां सवाल सिर्फ पंखे लगाने का नहीं है। सवाल यह है कि जिस काम का वादा जनप्रतिनिधि ने किया, उसे पूरा करने की जिम्मेदारी आखिर किसी दूसरे जनप्रतिनिधि को क्यों उठानी पड़ी?
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घोषणाओं की फाइल मोटी या विकास की जमीन?
चिरईगांव में अब बहस इस बात पर नहीं है कि किसने कितने वादे किए। असली सवाल यह है कि किसके वादे कितने काम में बदले? ब्लॉक प्रमुख के समर्थक पिछले पांच वर्षों में विकास खंड के कायाकल्प और विभिन्न विकास कार्यों को अपनी उपलब्धि बता रहे हैं। वहीं मंत्री के समर्थकों के पास भी अपने विकास कार्यों और स्वीकृत परियोजनाओं का हिसाब हो सकता है।
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लेकिन जनता के बीच सबसे बड़ा पैमाना एक ही है कि काम दिखाई दे रहा है या नहीं? जनता के सवाल का जवाब कौन देगा? यदि मिनी ट्रॉमा सेंटर की घोषणा हुई थी तो उसकी वर्तमान स्थिति क्या है? क्या उसका प्रस्ताव स्वीकृत हुआ? बजट जारी हुआ या नहीं? भूमि और निर्माण की प्रक्रिया कहां तक पहुंची? और यदि योजना आगे नहीं बढ़ी तो इसकी वजह क्या रही? इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग और स्वयं मंत्री की ओर से सामने आना चाहिए। क्योंकि चुनावी मंच से किया गया वादा जब वर्षों बाद भी जमीन पर नजर नहीं आता, तो जनता सवाल पूछती है। घोषणा किसलिए थी और इंतजार कब तक?
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चिरईगांव की तस्वीर फिलहाल यही कहानी कहती नजर आती है एक तरफ बड़े वादे, दूसरी तरफ छोटे लेकिन दिखाई देने वाले काम। अब फैसला जनता को करना है कि उसके लिए वादे महत्वपूर्ण हैं या विकास का जमीन पर दिखाई देना। “मंत्री के वादे फाइलों में, ब्लॉक प्रमुख के काम जमीन पर! चिरईगांव में पांच साल के विकास का हिसाब मांग रही जनता”
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