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Tuesday, September 01, 2026
जनता दर्शन में जिलाधिकारी ने सुनीं फरियादियों की समस्याएं
Wednesday, August 26, 2026
शाकुंतलम सोसाइटी की पार्किंग में विवाद, हाथापाई और अभद्रता के आरोप; जांच की मांग
वाराणसी: शाकुंतलम सोसाइटी की पार्किंग में विवाद के दौरान कथित हाथापाई और अभद्र व्यवहार का मामला सामने आया है। सोसाइटी के सचिव की ओर से मामले को लेकर शिकायत करते हुए घटना की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
शिकायत के मुताबिक, सोसाइटी में किराये पर रहने वाले नितिन धाकते के संबंध में आरोप है कि पार्किंग परिसर में विवाद के दौरान उनके द्वारा कथित रूप से हाथापाई की गई। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि सोसाइटी के एक निवासी एवं डॉक्टर के साथ अभद्र व्यवहार तथा मारपीट की घटना सामने आई।
मामले को लेकर सोसाइटी के निवासियों के बीच भी चिंता जताई गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संबंधित व्यक्ति द्वारा अपने पद अथवा प्रभाव का हवाला देते हुए अन्य निवासियों पर दबाव बनाने का प्रयास किया जाता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
CCTV फुटेज से सामने आ सकता है पूरा घटनाक्रम
सोसाइटी सचिव ने प्रबंधन से मांग की है कि पार्किंग परिसर में लगे CCTV कैमरों की फुटेज सुरक्षित कर उसकी जांच की जाए। इसके साथ ही घटना के प्रत्यक्षदर्शियों के बयान लेकर पूरे घटनाक्रम की वास्तविकता सामने लाई जाए। शिकायत में कहा गया है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो सोसाइटी के नियमों के अनुसार संबंधित व्यक्ति के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो।
निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगी सच्चाई
मामले में फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। ऐसे में CCTV फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्य इस विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। सोसाइटी प्रबंधन के सामने अब चुनौती यह है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए और यदि कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
Monday, August 24, 2026
ओडिशा के पास कार्गो शिप डूबने से हड़कंप, 22 लोग लापता; 2 नाविकों का रेस्क्यू, सर्च ऑपरेशन जारी
नई दिल्ली: ओडिशा तट से 200 नॉटिकल मील से ज्यादा दूर पनामा के झंडे वाला कार्गो शिप MV Ocean Winner समुद्र में डूब गया। जहाज पर कुल 24 लोग सवार थे, जिनमें से 22 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।
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हादसे की सूचना मिलते ही भारतीय नौसेना और कोस्ट गार्ड ने बड़े स्तर पर सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। नौसेना के P-8I समुद्री निगरानी विमान ने समुद्र में लाइफ राफ्ट का पता लगाया।
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इसके बाद पास में मौजूद एक जहाज की मदद से दो नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया। वहीं बाकी 22 लोगों की तलाश के लिए समुद्री क्षेत्र में लगातार अभियान चलाया जा रहा है।
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फिलहाल हादसे के कारणों की जानकारी सामने नहीं आई है। भारतीय नौसेना और कोस्ट गार्ड की टीमें लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं।
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Thursday, August 13, 2026
18 लाख 50 हजार बच्चों को 14 अगस्त को एल्बेंडाजोल की दवा खिलाई जाएगी
वाराणसी: जनपद में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान के अंतर्गत 14 अगस्त को 1 से 19 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 18 लाख 50 हजार बालक-बालिकाओं को एल्बेंडाजोल की दवा खिलाई जाएगी। अभियान के तहत सरकारी एवं मान्यता प्राप्त विद्यालयों, निजी विद्यालयों तथा मदरसों के विद्यार्थियों को उनके शिक्षकों के सहयोग से दवा दी जाएगी। साथ ही विद्यालय न जाने वाले बच्चों को भी इस अभियान में शामिल किया गया है।
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एन. पी. सिंह ने बताया कि आंतों में कृमि संक्रमण के कारण बच्चों में कुपोषण एवं एनीमिया की समस्या उत्पन्न हो सकती है, जिससे उनका शारीरिक विकास प्रभावित होता है। कृमि मुक्ति से बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में सुधार होता है, एनीमिया नियंत्रण में सहायता मिलती है तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता एवं सीखने की क्षमता में वृद्धि होती है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को निर्धारित तिथि पर एल्बेंडाजोल की दवा अवश्य दिलवाएं।
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अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. संजय राय ने बताया कि अभियान के अंतर्गत लगभग 7 लाख 40 हजार बच्चे शहरी क्षेत्र तथा 11 लाख 10 हजार बच्चे ग्रामीण क्षेत्र में लक्षित हैं। दवा वितरण के लिए 3,914 आंगनबाड़ी केंद्रों तथा 2,853 सरकारी, मान्यता प्राप्त एवं निजी विद्यालयों एवं मदरसों में आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।
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उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में आरबीएसके टीम के चिकित्सक तथा शहरी क्षेत्रों में अर्बन पीएचसी के चिकित्सकों के साथ-साथ जनपद की सभी एएनएम एवं आशा कार्यकर्ता अभियान में सक्रिय सहयोग करेंगी। विद्यालय न जाने वाले बच्चों तथा ईंट-भट्ठों पर कार्यरत श्रमिकों के बच्चों को भी इस अभियान के अंतर्गत दवा उपलब्ध कराई जाएगी।
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अभियान के दौरान 1 से 2 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को एल्बेंडाजोल की आधी गोली तथा 2 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों को एक पूर्ण गोली दी जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि 14 अगस्त को किसी कारणवश दवा से वंचित रह गए बच्चों के लिए 18 अगस्त को मॉप-अप राउंड आयोजित किया जाएगा, जिससे लक्षित सभी बच्चों को शत-प्रतिशत कृमि मुक्ति दवा उपलब्ध कराई जा सके।
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Wednesday, August 12, 2026
वादों का ट्रॉमा सेंटर हवा में, ब्लॉक प्रमुख ने जमीन पर कर दिया काम!
वाराणसी: विकास खंड चिरईगांव में इन दिनों एक सवाल तेजी से चर्चा में है पांच साल में किसने ज्यादा काम किया और किसके हिस्से में सिर्फ वादे आए? एक तरफ शिवपुर विधानसभा से कैबिनेट मंत्री एवं विधायक अनिल राजभर हैं, जिनके बड़े-बड़े विकास वादों को लेकर स्थानीय लोगों की उम्मीदें जुड़ी रहीं। दूसरी तरफ ब्लॉक प्रमुख अभिषेक कुमार सिंह हैं, जिनके कार्यकाल में विकास खंड परिसर से लेकर स्थानीय सुविधाओं तक कई कार्य कराए जाने का दावा किया जा रहा है।
अब सवाल यह है कि घोषणाओं और धरातल पर हुए काम के बीच आखिर कितना फासला है? कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र को मिनी ट्रॉमा सेंटर बनाने का वादा साल बीते कई सालों से किया हुआ है लेकिन अभी तक इंतजार खत्म नहीं हुआ। इसीलिए चिरईगांव प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को मिनी ट्रॉमा सेंटर बनाए जाने का मुद्दा सबसे ज्यादा चर्चा में है।
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स्थानीय लोगों के अनुसार, कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने विधायक बनने के बाद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का दौरा किया था। उस दौरान इसे मिनी ट्रॉमा सेंटर बनाने की बात कही थी। बताया जाता है कि इसके बाद के दौरों में भी इस घोषणा को दोहराया गया। लेकिन सवाल वहीं खड़ा है कि घोषणा के बाद हुआ क्या?
आपको बता दें कि दूसरा कार्यकाल भी समाप्ति की ओर है, लेकिन स्थानीय स्तर पर लोगों का कहना है कि प्रस्तावित मिनी ट्रॉमा सेंटर का निर्माण अब तक जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा है। यही वह बिंदु है जहां जनता के बीच सवाल उठता है कि अगर घोषणा इतनी महत्वपूर्ण थी तो वर्षों बाद भी काम शुरू क्यों नहीं हुआ?
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मंत्री का बड़ा वादा नहीं, ब्लॉक प्रमुख का छोटा काम दिखा
विडंबना देखिए जिस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को मिनी ट्रॉमा सेंटर बनाने की बात कही गई थी, उसी परिसर में मरीजों और अस्पताल कर्मचारियों की सुविधा के लिए इंटरलॉकिंग का कार्य ब्लॉक प्रमुख अभिषेक कुमार सिंह की ओर से कराया गया।यानी एक तरफ मिनी ट्रॉमा सेंटर जैसी बड़ी घोषणा का इंतजार, तो दूसरी तरफ उसी स्वास्थ्य केंद्र में आने-जाने की बुनियादी सुविधा को दुरुस्त करने का काम। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल परिसर में रास्ते की स्थिति सुधरने से मरीजों, कर्मचारियों और अधिकारियों को सुविधा मिली है।
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बैठक कक्ष के पंखे भी बने सियासत का आईना
चिरईगांव विकास खंड के बैठक कक्ष में पंखे लगवाने का मामला भी अब चर्चा में है। बताया जा रहा है कि बैठक कक्ष में पंखे लगवाने का आश्वासन कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर की ओर से दिया गया था। लेकिन स्थानीय दावे के मुताबिक, यह काम भी अंततः ब्लॉक प्रमुख अभिषेक कुमार सिंह द्वारा कराया गया। यहां सवाल सिर्फ पंखे लगाने का नहीं है। सवाल यह है कि जिस काम का वादा जनप्रतिनिधि ने किया, उसे पूरा करने की जिम्मेदारी आखिर किसी दूसरे जनप्रतिनिधि को क्यों उठानी पड़ी?
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घोषणाओं की फाइल मोटी या विकास की जमीन?
चिरईगांव में अब बहस इस बात पर नहीं है कि किसने कितने वादे किए। असली सवाल यह है कि किसके वादे कितने काम में बदले? ब्लॉक प्रमुख के समर्थक पिछले पांच वर्षों में विकास खंड के कायाकल्प और विभिन्न विकास कार्यों को अपनी उपलब्धि बता रहे हैं। वहीं मंत्री के समर्थकों के पास भी अपने विकास कार्यों और स्वीकृत परियोजनाओं का हिसाब हो सकता है।
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लेकिन जनता के बीच सबसे बड़ा पैमाना एक ही है कि काम दिखाई दे रहा है या नहीं? जनता के सवाल का जवाब कौन देगा? यदि मिनी ट्रॉमा सेंटर की घोषणा हुई थी तो उसकी वर्तमान स्थिति क्या है? क्या उसका प्रस्ताव स्वीकृत हुआ? बजट जारी हुआ या नहीं? भूमि और निर्माण की प्रक्रिया कहां तक पहुंची? और यदि योजना आगे नहीं बढ़ी तो इसकी वजह क्या रही? इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग और स्वयं मंत्री की ओर से सामने आना चाहिए। क्योंकि चुनावी मंच से किया गया वादा जब वर्षों बाद भी जमीन पर नजर नहीं आता, तो जनता सवाल पूछती है। घोषणा किसलिए थी और इंतजार कब तक?
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चिरईगांव की तस्वीर फिलहाल यही कहानी कहती नजर आती है एक तरफ बड़े वादे, दूसरी तरफ छोटे लेकिन दिखाई देने वाले काम। अब फैसला जनता को करना है कि उसके लिए वादे महत्वपूर्ण हैं या विकास का जमीन पर दिखाई देना। “मंत्री के वादे फाइलों में, ब्लॉक प्रमुख के काम जमीन पर! चिरईगांव में पांच साल के विकास का हिसाब मांग रही जनता”
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Saturday, August 08, 2026
अईली में फिर सामने आया ग्रामप्रधान के लेटरपैड के कथित दुरुपयोग का मामला, पहले भी दर्ज हो चुकी है FIR
वाराणसी: चिरईगांव विकासखंड की अईली ग्राम सभा में ग्रामप्रधान/प्रशासक के लेटरपैड के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आया है। ग्रामप्रधान का आरोप है कि कुछ लोगों द्वारा उनके लेटरपैड का इस्तेमाल कर फर्जी तरीके से आय और जाति प्रमाणपत्र जारी किए जा रहे हैं। मामले के सामने आने के बाद प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग की गई है।
ग्रामप्रधान/प्रशासक रामफेर के मुताबिक, हाल ही में वीरेंद्र कुमार के नाम से एक आय प्रमाणपत्र जारी किया गया है। उनका दावा है कि उक्त प्रमाणपत्र पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं। उन्होंने बताया कि इसके अलावा भी कुछ अन्य आय और जाति प्रमाणपत्र उनके लेटरपैड पर जारी किए गए हैं, जिन पर न तो उनका हस्ताक्षर है और न ही तारीख दर्ज है।
पहले भी दर्ज कराई थी FIR
रामफेर ने बताया कि कुछ महीने पहले भी इसी तरह ग्रामप्रधान के लेटरपैड के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आया था। उस मामले में उन्होंने एक व्यक्ति के खिलाफ चौबेपुर थाने में FIR दर्ज कराई थी। उस समय उन्होंने मामले के पीछे चुनावी रंजिश होने का आरोप लगाया था। अब दोबारा इसी तरह के दस्तावेज सामने आने के बाद ग्रामप्रधान ने मामले को गंभीर बताते हुए जांच की मांग की है।
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विरोधियों पर लगाया फंसाने का आरोप
ग्रामप्रधान रामफेर का आरोप है कि चुनाव में उनके विरोध में रहे कुछ लोग उन्हें फंसाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके नाम और लेटरपैड का गलत इस्तेमाल कर ऐसे दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं, जिनसे उनकी छवि और पद को नुकसान पहुंच सकता है।
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उन्होंने कहा कि पूरे मामले की शिकायत शासन और प्रशासन से की जाएगी और फर्जीवाड़े की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कराने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि, प्रमाणपत्रों के फर्जी होने और उन्हें जारी करने वालों के संबंध में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
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