UP Vidhansabha Election 2022: यूपी में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. 2017 में मोदी लहर ने इस हिंदी भाषी राज्य पर अच्छा-खासा प्रभाव छोड़ा, नतीजा यह रहा कि भाजपा ने उत्तर प्रदेश की सत्ता पर कब्जा जमाया. कयास लगाए जा रहे हैं कि इस बार विपक्ष को पीएम मोदी के साथ योगी लहर का भी सामना करना पड़ेगा. इलेक्शन को देखते हुए हम लेकर आए हैं उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों का एनालिसिस. यहां जानें बिजनौर जिले की धामपुर सीट (Dhampur Seat Detail) के बारे में...
यूपी विधानसभा चुनाव 2022: दो बार से SP का कब्जा बिलारी सीट पर, क्या BJP भेद पाएगी किला
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सीट का
नाम |
धामपुर
विधानसभा |
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सीट
नंबर |
20 |
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मतदाता |
2,82,279 |
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पुरुष |
1,43,962 |
|
महिला |
1,38,316 |
इतिहास धामपुर विधानसभा सीट का
बिजनौर जिले में कुल 8 विधानसभा
सीट हैं, धामपुर भी उन्हीं में से एक है. नगीना
लोकसभा क्षेत्र में आने वाली यह सीट अनारक्षित है. "परिसीमन एक्ट-1956"
के बाद धामपुर को विधानसभा सीट बनाया गया,
पहली बार यहां 1957 में
चुनाव हुए. फिर "परिसीमन एक्ट-2008" के तहत
इसे उत्तर प्रदेश विधानसभा का सीट नंबर 20 दिया
गया. 2017 विधानसभा चुनाव में भाजपा का 24
साल का सूखा खत्म हुआ और उनके उम्मीदवार अशोक कुमार राणा ने यहां
जीत हासिल की. इससे पहले 1993 में भाजपा
ने आखिरी बार यहां विधानसभा चुनाव जीता था.
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इस क्षेत्र की सबसे बड़ी शुगर मिल है यहां
आजादी से पहले साल 1933 में यहां
शुगर मिल स्थापित हुई, जो
क्षेत्र की पहली और सबसे बड़ी शुगर मिल है. इसमें हर दिन 300
टन तक गन्ना निचोड़ने की क्षमता है. इसे सुल्ताना डाकू की कर्मभूमि
भी कहा जाता है, जिन्होंने अंग्रेजों की नाक में दम कर
दिया था.
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ऐसा बताया जाता है कि धामपुर से करीब 38
किलोमीटर दूर विदुर कुटी स्थित है, महाभारत
महाकाव्य के अनुसार दुर्योधन से अनबन के बाद महात्मा विदुर ने अपना शेष जीवन यहीं
बिताया था. कालिदास द्वारा रचित अभिज्ञानशाकुंतलम महाकाव्य के अनुसार श्री कृष्ण
ने इसी जगह से कन्व आश्रम की यात्रा की थी.
धामपुर सीट पर कौनसी पार्टी करती है डॉमिनेट?
धामपुर विधानसभा सीट पर साल 1957 से 2017
तक 16 बार
विधानसभा चुनाव हुए. इनमें 5 बार
कांग्रेस, 4 बार भाजपा,
3 बार समाजवादी पार्टी, 2 बार जनता
पार्टी और 1-1 बार बीकेडी और बहुजन समाज पार्टी उम्मीदवार
ने जीत हासिल की. वहीं पिछले तीन चुनावों में क्रमशः बहुजन समाज पार्टी,
समाजवादी पार्टी और भाजपा ने जीत दर्ज की. 1993
में आखिरी बार यहां भाजपा विधायक ने जीत हासिल की,
फिर 24 साल के
लंबे इंतजार के बाद 2017 में भाजपा
को यहां जीत नसीब हो सकी.
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