17 साल पहले सपा का साथ छोड़ने वाले बाहुबली पूर्व सांसद रिजवान जहीर ने घर वापसी की है. रिजवान जहीर ने शुक्रवार को दोबारा सपा का हाथ थाम लिया है. रिजवान जहीर के साथ उनकी बेटी जेबा ने भी सपा की सदस्यता ग्रहण की. 30 साल के राजनैतिक कैरियर में रिजवान जहीर ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बसपा और पीस पार्टी तक का दामन थामा. आपको बता दें कि रिजवान जहीर तीन बार विधायक और दो बार सांसद रह चुके हैं. उनकी पत्नी हुमा दो बार बतौर जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी संभाल चुकी हैं. वहीं, रिजवान जहीर के वापस आने से जिले में हाशिये पर जा रही सपा को नई जान मिल गई है.
रिजवान
जहीर ने 2004 में छोड़ा था सपा
राजनीतिक सफर की शुरूआत करने से
पहले भी रिजवान जहीर की छवि एक दबंग व्यक्ति के तौर पर थी. अलीगढ़ मुस्लिम
विश्वविद्यालय से तालीम लेने वाले जहीर बास्केटबॉल खिलाड़ी भी रह चुके हैं. रिजवान
जहीर ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में 1989 में तुलसीपुर विधानसभा क्षेत्र से पहला
चुनाव जीता था. इसके बाद यह सिलसिला 2004 में जाकर थमा. 1993 में सपा से विधायक चुने गए. 1996 में रिजवान जहीर ने बसपा की सदस्यता ली
और तीसरी बार विधायक बने. इसके बाद 1998 में रिजवान जहीर फिर सपा में लौट आए और
बलरामपुर लोकसभा सीट से सांसद बने. 1999 में वो दोबारा सपा के ही टिकट पर सांसद
चुने गए. लेकिन 2004 में
समाजवादी पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव से संबंध बिगड़ने पर उन्होंने समाजवादी
पार्टी छोड़ दी थी.
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बेटी जेबा भी हुई थी कांग्रेस
में शामिल
रिजवान जहीर की पत्नी हुमा रिजवान
2005 और 2010 में जिला पंचायत की अध्यक्ष चुनी गईं.
रिजवान जहीर ने 2009 में
बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर और 2014 में पीस पार्टी के टिकट पर श्रावस्ती
लोकसभा का चुनाव लड़ा, लेकिन
दोनों बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा. साल 2017 के विधानसभा चुनावों के सामान्य
निर्वाचन में उन्होंने अपनी बेटी जेबा रिजवान को कांग्रेस के टिकट पर तुलसीपुर
विधानसभा सीट से चुनाव लड़वाया. लेकिन मोदी लहर में जेबा रिजवान जीत हासिल नहीं कर
सकीं. इसके लिए रिजवान जहीर कांग्रेस पार्टी में भी शामिल हुए थे. रिजवान जहीर को कांग्रेस
में शामिल करने के लिए तात्कालिक प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर व गुलाम नबी आजाद उनके
घर पर आए थे. 2019 के
आम चुनावों में उन्होंने फिर बहुजन समाज पार्टी का दामन थामा और खुद चुनाव ना लड़कर
बहुजन समाज पार्टी उम्मीदवार राम शिरोमणि वर्मा को सपोर्ट किया और चुनावी जीत दर्ज
कराई.
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कई बार जेल जा चुके हैं रिजवान जहीर
26 अप्रैल 2021 को तीसरे चरण के पंचायत चुनाव में मतदान
के बाद तुलसीपुर थाना क्षेत्र के बेली खुर्द गांव में आगजनी और बवाल के आरोप पर
पुलिस ने पूर्व सांसद रिजवान को गिरफ्तार किया था. इससे पहले रिजवान जहीर साल 1993 में विधायक रहते हुए जेल गए थे. हर्रैया
सतघरवा थाना क्षेत्र में घटित हुए हत्या के मामले में रिजवान को मुख्य अभियुक्तों
में शामिल किया गया था. इससे पहले वह 90 के दशक में राजनीति में आने से पहले कई
बार जेल जा चुके हैं. 1993 के
बाद 2021 में
यह दूसरा मामला है कि राजनीति में रहते हुए रिजवान जहीर को जेल जाना पड़ा. बताया
जाता है कि रिजवान जहीर पिछले 30 सालों से बलरामपुर और इसके आसपास के जिलों में राजनीतिक
प्रासंगिक हैं. उनकी मुस्लिम, पिछड़ा और दलित वर्ग के वोटर्स पर उनकी खास पकड़ है.

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