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Saturday, October 10, 2026

मवैया तालाब की जमीन पर विवाद, नगर निगम के लेखपाल के दावे से ग्रामीणों में नाराजगी

वाराणसी: सारनाथ आशापुर रोड स्थित पुराने आरटीओ कार्यालय के पास मवैया तालाब की जमीन को लेकर विवाद सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि मौके पर पहुंचे नगर निगम के लेखपाल ने उक्त स्थल को तालाब मानने से इनकार करते हुए इसे भूमिधरी जमीन बताया। वहीं, ग्रामीणों का दावा है कि संबंधित आराजी संख्या 192/1 में तालाब मौजूद है, जिसका उपयोग लंबे समय से धार्मिक और सामाजिक कार्यों के लिए किया जाता रहा है।



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ग्रामीणों के अनुसार, मौके पर एक व्यक्ति मेहता और उनके साथ एक अधिकारी भी पहुंचे थे। इस दौरान नगर निगम के लेखपाल भी मौजूद रहे। लेखपाल की ओर से जमीन को तालाब के बजाय भूमिधरी बताए जाने के बाद विवाद और गहरा गया। ग्रामीणों ने इस मामले में नगर निगम के लेखपाल की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, जमीन की वास्तविक स्थिति राजस्व अभिलेखों और आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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धार्मिक आयोजनों के लिए होता है तालाब का इस्तेमाल

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस स्थल पर लंबे समय से दसवां संस्कार, पिंडदान, मूर्ति विसर्जन, छठ पूजा और जिउतिया जैसे धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। ऐसे में जमीन की स्थिति को लेकर उठे विवाद से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराकर तालाब की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

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जांच के बाद ही स्थिति होगी स्पष्ट: एसडीएम

इस संबंध में उपजिलाधिकारी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराने के बाद ही कोई स्पष्ट जवाब दिया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि यदि जांच में जमीन तालाब की पाई जाती है, तो उसके सुंदरीकरण का कार्य कराया जाएगा। वहीं, यदि जमीन किसी की भूमिधरी पाई जाती है, तो नियमानुसार संबंधित पक्ष अपने हिसाब से कार्य कर सकता है।

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अब जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

मवैया तालाब को लेकर उठे विवाद के बीच अब ग्रामीणों की निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं। ग्रामीणों की ओर से लगाए गए आरोपों की पुष्टि और जमीन की वास्तविक स्थिति का निर्धारण राजस्व अभिलेखों की जांच के बाद ही हो सकेगा। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और ग्रामीणों की शिकायत का समाधान हो पाता है या नहीं। मौके पर मुलायम यादव, अभय पांडेय, घनश्याम राजभर, सुनील कुमार, सोनू यादव, रामजी राजभर, मोनू यादव, सियाराम यादव और कुलुर यादव सहित अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।

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