वाराणसी: काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर में दुकान के फर्जी आवंटन मामले में दशाश्वमेध पुलिस ने मास्टर माइंड को भी गिरफ्तार कर लिया है। वाराणसी के मंडुवाडीह क्षेत्र के शिवदासपुर निवासी महेंद्र प्रजापति पूरे मामले का मास्टर माइंड है। दशाश्वमेध पुलिस ने बुधवार को उसे बांसफाटक के पास से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
महेंद्र प्रजापति ने ही कथित
तौर पर शासन की ओर से जारी प्रमाणपत्र रत्नशेखर नामक युवक के माध्यम से नौसिखिया
जमीन कारोबारी शशिकांत चौरसिया तक पहुंचवाया था। उसी के आधार पर शशिकांत चौरसिया
ने कॉरिडोर की दुकानें 70 और
40 लाख
में बेचने का विज्ञापन फेसबुक पर डाल दिया था। पहले वह थंब इंप्रेशन मशीन से
संबंधित व्यवसाय करता था। लॉकडाउन में उसका धंधा बंद हुआ तो जमीन के कारोबार से
जुड़ गया। महेंद्र प्रजापति भी जमीन का कारोबारी है। काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर
की दुकानों के आवंटन को लेकर फर्जीवाड़ा की साजिश उसी ने रची और अपने साथ अन्य को
भी शामिल किया।
प्रकरण में दशाश्वमेध पुलिस पहले ही दो आरोपितों को गिरफ्तार
कर चुकी है। फेसबुक पर विज्ञापन अपलोड करने वाले पानदरीबा के सूरजकुंड निवासी
शशिकांत और सुसुवाही के नासिरपुर के विश्वनाथपुरी निवासी रत्नशेखर सिंह जेल भेजे
जा चुके हैं। शशिकांत चौरसिया को प्रमाणपत्र और विज्ञापन अपलोड करने के लिए
रत्नशेखर ने दिया था। जबकि विज्ञापन अपलोड करने के लिए प्रमाण पत्र रत्नशेखर के
माध्यम से महेंद्र ने मुहैया कराया था। गिरफ्तारी करने वाली टीम में थाना प्रभारी
राजेश कुमार सिंह, उप
निरीक्षक मधुकर सिंह व अन्य रहे।
महेंद्र प्रजापति बरगला रहा
पुलिस को
महेंद्र को गिरफ्तार कर दशाश्वमेध
पुलिस ने पूछताछ शुरू की तो बरगलाता रहा। महेंद्र ने बताया कि उसे प्रमाणपत्र और
विज्ञापन अपलोड करने के लिए किसी और ने दिया है। नाम पूछने पर नहीं बताया। आशंका
है कि इस फर्जीवाड़े में और लोग शामिल हो सकते हैं।
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