वाराणसी कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने शोक संदेश भेजकर बुनकर बिरादराना के चहेते और तंज़ीम बाईसी के सरदार हाजी अब्दुल कलाम साहब के इंतकाल पर दुख जताया है। पूर्व विधायक अजय राय और पूर्व सांसद राजेश मिश्रा ने यह शोकपत्र उनके परिवार वालों को देकर ईश्वर से उनके बेहतरी की कामना की। शोक संवेंदना देते हुए उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि इस दुःख की घडी में उनके परिवार को उनके जाने के गम को सहन करने की शक्ति प्रदान करे। वहीं समाजवादी पार्टी के भी नेता दुख में शामिल हुए। इलाज के दौरान हाजी साहब का कल रात निधन हो गया था बीएचयू में।
बाईसी तंजीम की पूरी कबीना ने दी मिट्टी
आज अर्रा स्थित उनके खानदानी कब्रिस्तान में अब्दुल कलाम को सुपुर्दे ख़ाक किया गया। इस दौरान बाईसी तंजीम के कार्यवाहक सरदार गुलाम मोहम्मद उर्फ़ दरोगा अपनी पूरी काबीना के साथ मिटटी दने के लिए मौजूद थे। वहीं बुनकरी समाज से सरदार की अंतिम यात्रा में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए। जनाजे की नमाज़ सरदार साहब के बड़े पुत्र स्वालेह अंसारी ने पढ़ी। समाजवादी पार्टी के महानगर अध्यक्ष विष्णु शर्मा ने शोक संवेदना प्रकट करते हुए कहा कि उन्होंने कम समय में ही बुनकर समाज की भलाई और उनके उत्थान के लिए बहुत काम किया। सरदार साहब एक सजग समाजसेवी का उत्तर दायित्व का निर्वहन करते रहे हैं। कंधे पर बड़ी जिम्मेदारी होने के बावजूद हमेशा खुशमिजाजी के साथ आम जनों से मिलते रहे और उनकी समस्याओं का समाधान करा कर ही दम लेते थे।
बुनकरों में सबसे लोकप्रिय सरदार थे अब्दुल कलाम
सरदार गुलाम मोहम्मद ने बताया कि सरदार हाजी अब्दुल बुनकरों के समाज में अपने नेक कामों से लोकप्रियता हासिल कर ली थी। उसी का नतीजा था कि अपने कारोबार को बंद कर आज उनकी मिटटी में सारे बुनकर पहुंचे। 4 अप्रैल 2017 को उन्हें तंजीम बाइसी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। आज सभी ने अपनी नम आंखो से उन्हें सुपुर्दे खाक किया। उनके चाहने वालो में हिंदू भाई भी बड़ी तादाद में सरदार साहब को मिटटी देने पहुंचे। कहा कि हाजी कलाम साहब की भरपाई कर पाना मुश्किल है। वो बुनकर समाज की एक मज़बूत कड़ी थे। इस दौरान मिटटी देने वालो में तंज़ीम बाईसी के हाजी मंजूर, हाजी हाफिज नसीर, सरदार मक़बूल हसन, सरदार हासिम अंसारी, हैदर महतो, फैसल महतो समेत कई नामी हस्तियां शामिल थीं।

No comments:
Post a Comment