नई दिल्ली: अमेरिका के वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में हो रही देरी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने पीएम मोदी पर आरोप लगाते हुए कहा है कि यह समझौता इसलिए अटका हुआ है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन नहीं किया। यह बयान उन्होंने चर्चित 'ऑल-इन पॉडकास्ट' में दिया, जिसकी मेजबानी शैमथ पालिहापिटिया कर रहे थे।
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पॉडकास्ट में और क्या बोले हॉवर्ड लुटनिक?
पॉडकास्ट के दौरान लुटनिक ने साफ कहा,- "स्पष्ट कर दूं, यह उनका (ट्रंप का) समझौता है। वह अंतिम निर्णय लेने वाले हैं। वह सौदे करते हैं।" उन्होंने आगे कहा, "इसलिए मैंने कहा, आपको मोदी से बात करनी होगी... वे ऐसा करने में असहज थे।" इसके बाद लुटनिक ने सीधे आरोप लगाते हुए कहा- "तो मोदी ने फोन नहीं किया। लुटनिक का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को एक अहम विधेयक पारित किया। इस विधेयक में रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 500% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया है। इसका मकसद ऐसे देशों को आर्थिक रूप से "दंडित करना" बताया गया है।
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भारत, चीन और ब्राजील पर दबाव बनाने की तैयारी
अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने इस बिल को लेकर कहा कि इससे अमेरिका को भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों के खिलाफ मजबूत स्थिति मिलेगी। उनका कहना था कि यह कदम इन देशों पर दबाव बनाएगा ताकि वे सस्ता रूसी तेल खरीदना बंद करें। यह पहला मौका नहीं है जब भारत को इस मुद्दे पर अमेरिकी दबाव का सामना करना पड़ा हो। अगस्त में अमेरिका ने भारतीय आयातों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए थे। आरोप लगाया गया था कि भारत द्वारा रूसी तेल खरीदना, यूक्रेन में रूस की 'युद्ध मशीन' को मजबूती दे रहा है। इन फैसलों के बाद भारतीय उत्पादों पर अमेरिका में लगने वाला कुल टैरिफ 50% तक पहुंच गया है। इसमें 25% अतिरिक्त टैरिफ और डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाया गया 25% प्रतिशोधी टैरिफ शामिल है।
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तनाव के बावजूद जारी रही व्यापार की बातचीत
इन सभी मतभेदों और टैरिफ विवादों के बावजूद, भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता के कई दौर हो चुके हैं। इसमें 10 से 12 दिसंबर तक अमेरिकी अधिकारियों का नई दिल्ली दौरा भी शामिल रहा। दोनों देश न सिर्फ एक ढांचागत व्यापार समझौते (Framework Trade Agreement) बल्कि एक व्यापक व्यापार समझौते (Comprehensive Trade Agreement) पर भी समानांतर रूप से बातचीत कर रहे हैं। इसका उद्देश्य लंबे समय तक व्यापारिक रिश्तों को स्थिर और मजबूत बनाना है। फरवरी में, भारत और अमेरिका के टॉप लीडर्स ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि व्यापार समझौते के पहले चरण को 2025 की विंटर सीजन तक पूरा करने का प्रारंभिक लक्ष्य रखा जाए। हालांकि, रूस के साथ भारत का व्यापार अब भी इस प्रक्रिया में एक बड़ा गतिरोध बना हुआ है।
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2030 तक $500 बिलियन से ज्यादा व्यापार का लक्ष्य
प्रस्तावित समझौते का बड़ा लक्ष्य है कि 2030 तक भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा $191 बिलियन से बढ़ाकर $500 बिलियन से अधिक किया जाए। आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 में लगातार चौथे वर्ष अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार रहा। इस अवधि में दोनों देशों के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार $131.84 बिलियन रहा। इस व्यापार में $86.5 बिलियन का भारतीय निर्यात शामिल था। अमेरिकी बाजार भारत के कुल माल निर्यात का लगभग 18% और आयात का 6.22% रहा। जबकि कुल व्यापार का 10.73% हिस्सा रखता है।
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आसान नहीं है आगे का सफर
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की राह में फिलहाल राजनीति, रूस-यूक्रेन युद्ध और ऊर्जा व्यापार जैसे मुद्दे बड़ी अड़चन बने हुए हैं। अमेरिकी मंत्री का यह दावा कि एक फोन कॉल की कमी से डील अटकी है, इस पूरे विवाद को और ज्यादा राजनीतिक रंग देता है। आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि रणनीतिक साझेदारी भारी पड़ती है या भू-राजनीतिक दबाव।
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