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Wednesday, January 26, 2022

UP Election 2022: गृहमंत्री और पश्चिमी यूपी के जाट नेताओं के बीच बैठक खत्म, जाट नेता बोले- 'जो राम को लाए हैं हम उनको लाएंगे'

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 के पहले चरण के मतदान में अब दो हफ्ते रह गए हैं. ऐसे में उत्तर प्रदेश के सभी राजनीतिक पार्टियां अपनी-अपनी गोटियां सेट करने में जुट गई हैं. इसी कड़ी में भाजपा के चाणक्य अमित शाह पश्चिमी यूपी में अच्छा खासा प्रभाव रखने वाले जाट समाज का दिल जीतने के लिए हर तरह की कोशिश कर रहे हैं. इसी क्रम में बुधवार को अमित शाह ने दिल्ली में 200 से अधिक समुदाय के नेताओं के साथ बैठक की. इस बैठक में कई जाट नेता भी शामिल हुए.मुलाकात खत्म होने के बाद जाट नेता शाह के साथ बैठक को लेकर मीडिया से अपनी बात कही 



'जो राम को लाए हैं हम उनको लाएंगे
जाट समुदाय के एक नेता ने बताया कि गृहमंत्री जी ने अपील की है कि भाजपा को वोट दें, हमारी कोई नाराजगी नहीं है. हमने पहले भी भरपूर वोट भाजपा को वोट दी थी. जाट समाज 2013 को भूला नहीं है. जो राम को लाए हैं, हम उनको लाएंगे. बहुत सारी बातें हुईं है.

क्या बोले जाट नेता
यूपी के बुलंदशहर के जाट नेता नरेंद्र सरोही ने कहा कि हमने चौधरी चरण सिंह के लिए भारत रत्न और सेंटर में आरक्षण की मांग की है. उन्होंने हमें कहा है कि समय मिलने पर मांगे पूरी की जाएगी. वहीं, रवींद्र राजोरा ने कहा कि अमित शाह जी ने मांगों को पूरा करने का भरोसा दिया है. बैठक में शामिल हुए शख्स ने कहा कि जाट समाज ने उनकों आने वाले चुनाव में समर्थन की बात की है.

अगर कोई शिकायत हो तो झगड़ा कर सकते हैं: अमित शाह 
बैठक के दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने जाट समुदाय के साथ 650 साल पुराना रिश्ता बताते हुए कहा कि आपने मुगलों के खिलाफ लड़ाई लड़ी, हम भी लड़ रहे हैं. जाट भी किसानों के लिए सोचते हैं और भाजपा भी. जाट देश की सुरक्षा के लिए सोचते हैं और भाजपा भी. अमित शाह ने आगे कहा कि यदि कोई शिकायत है तो उनसे झगड़ा कर सकते हैं, लेकिन पार्टी से कोई नाराजगी ना रखी जाए.

गौरतलब  है कि2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी गृहमंत्री अमित शाह ने ऐसी बैठक की थी. तब भी जाट वोटों पर विशेष ध्यान दिया गया था. नतीजा ये निकला कि बीजेपी ने 143 में से 108 सीटें अपने नाम कर ली थीं. 2019 के लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी के पक्ष में ही जाट वोट पड़ें और 29 सीटों में से 21 पर जीत दर्ज की गई. 

बता दें कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट करीब 17 प्रतिशत हैं. 45 से 50 सीट ऐसी हैं जहां जाट वोटर ही जीत-हार तय करते हैं, लेकिन करीब एक साल तक चले किसान आंदोलन की वजह से कहा जा रहा है कि जाट कहीं इस बार भाजपा से दूर न हो जाएं. पिछले चुनावों में भाजपा ने इस इलाके में अच्छा प्रदर्शन किया था.

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