वाराणसी हो या कोलकता थीम आधारित दुर्गा पूजनोत्सव का आयोजन कोई नई बात नहीं। देश काल और परिस्थितयों के अनुसार पूजा की थीम भी देखने को मिलती रही है। पिछले दो साल से कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को तबाह कर रखा है। इस दौरान चिकित्सकों ने पूरी दुनिया में बहुत बड़ी भूमिका निभाई। महिला चिकित्सकों की भूमिका कुछ ज्यादा ही महत्वपूर्ण रही। महिला चिकित्सा कर्मियों ने धरती के भगवान का हक अदा करते हुए लाखों-करोड़ों लोगों की जान बचाई।
उनके इस
सद्कृत्य के प्रति कृतज्ञयता ज्ञापित करने के लिए माता दुर्गा को कोरोना थीम पर
पूजनोत्सव के आयोजन को अनावश्यक रूप से विवादों में घसीटा जा रहा है। मौका परस्त
राजनीति करने वाले कुछ लोग बार-बार जिला प्रशासन से शिकायत कर रहे हैं। वाराणसी के
धर्माचार्यों की स्वीकृति के बाद भी अनरगल आरोप लगा कर पूजा को बाधित करने की
कोशिश कर रहे हैं। केंद्रीय पूजा समिति के अध्यक्ष तिलकराज मिश्रा ने आपत्ति करने
वालों से सवाल किया कि क्या कोरोना काल में महिला चिकित्सा कर्मियों में उन्हें
ईश्वर की झलक नहीं मिली। उन्होंने अपनी जान पर खेल कर जो कुछ किया उससे वे हमारे
लिए देवतुल्य पूज्य नहीं हुए? अगर ऐसा है तो कोरोना थीम पर आयोजित होने वाली दुर्गा पूजाओं
पर आपत्ति नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूजा पंडाल को अस्पताल की
थीम पर सजाया जा रहा है। देवी की सभी भुजाओं में परंपरागत अस्त्र-शस्त्र ही होंगे
जिनसे वह कोरोना रूपी महिषासुर का वध करती दिखेंगी। इस प्रकरण को लेकर केंद्रीय
पूजा समिति का प्रतिनिधिमंडल बुधवार की शाम कमिश्नर से मिलने वाला था लेकिन
वीवीआईपी मूवमेंट के कारण मुलाकात संभव नहीं हो सकी।
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