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Monday, September 27, 2021

वाराणसी पुलिस कमिश्नर ने थाना प्रभारियों को दी चेतावनी, लंबित मामले को जल्द निपटाने का दिया आदेश

वाराणसी के शहरी क्षेत्र में आने वाले थानों में अपराध और विवादों से जुड़े कुल 298 मामले लंबित पड़े हैं, जिसको लेकर अब पुलिस प्रशासन के शीर्ष अधिकारी काफी नाराज नजर आ रहे हैं। उत्तर प्रदेश चुनाव के मद्देनजर वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट ने 1 साल से अधिक समय तक लंबित मामलों को लटकाए रखने वाले थानों को अंतिम चेतावनी दी है। वाराणसी पुलिस कमिश्नर ए. सतीश गणेश ने आज पुराने मामले लटकाए रखने वाले शहर के आधा दर्जन थाना प्रभारियों को नोटिस दी है। साथ ही वाराणसी पुलिस कमिश्नर ए. सतीश गणेश ने कहा है कि 2020 या इससे पूर्व की विवेचना लंबित रखना अब भारी पड़ सकता है।

 


उन्होंने कहा कि अंतिम बार चेताया जा रहा है कि 1 महीने के अंदर इन मामलों को सुलझा लिया जाए, नहीं तो आधिकारिक कार्रवाई के लिए वे तैयार रहें। इससे पहले भी दो दर्जन दरोगा को हस्तांतरित और निलंबित कर कार्रवाई की जा चुकी है। वहीं कल देर रात वाराणसी के 18 सब इंस्पेक्टरों का फेरबदल किया गया है। शहर के सभी चौकी प्रभारियों की जगह बदल दी गई है। चुनाव से 6 माह पहले ही वाराणसी का पुलिस प्रशासन अब काफी मुस्तैद नजर आ रहा है। कानून और व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए सरकार का भी पुलिस पर दबाव बढ़ गया है, जिसके चलते ये फैसले लिए जा रहे हैं।


लंका थाने में सबसे ज्यादा केस लंबित


वाराणसी में सबसे ज्यादा 57 केस थानाध्यक्ष महेश पांडेय के लंका थाने में लंबित हैं। और वहीं, सारनाथ में 48 मामले पेंडिंग में हैं। यहां के थानाध्यक्ष सब इंस्पेक्टर नागेश सिंह है। इसके बाद पुलिस निरीक्षक सुनील कुमार के शिवपुर थाने में 40, अनूप शुक्ला के सिगरा थाने में 31, वेद प्रकाश राय के कैंट थाने में 29, रमाकांत दुबे के भेलूपुर थाने में 26 और परशुराम त्रिपाठी के मंडुआडीह में 10 मामले विगत 1 या उससे अधिक सालों से लंबित हैं। वाराणसी पुलिस कमिश्नर ने कहा है कि अक्टूबर तक इन थानों के मामलों का निपटारा नहीं हुआ तो कठोर से कठाेर कार्रवाई की जाएगी।

 

खोला जाएगा धूल फांक रहीं अपराध की फाइलों को

अब पुलिस को इन पुरानी धूल फांक रही अपराध और अपराधियों की फाइलों को झाड़-पोछकर खोलने का टाइम आ गया है। जल्द से जल्द इन मामलों से जुड़े अपराधियों और बदमाशों को सलाखो के पीछे डालने का दबाव होगा। वहीं, पुलिस की कार्यशैली से ऐसा लगता नहीं है कि इन मामलों को इतनी जल्दी निपटारा हो जाएगा।


शिव कुमार का अब तक कोई सुराग नहीं 2 साल से है गायब

लंका थाने का ही एक मामला देख लें तों BHU के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय का एक छात्र शिवकुमार पिछले 2 साल से गायब है। हैरत की बात यह है वह लंका थाने में पुलिस की आंख के सामने से ही ओझल हो जाता है और पुलिस को अब तक उसका कोई सुराग नहीं मिला। यहां तक कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के फटकारने और लज्जित करने के बाद स्थिति जस की तस है।


शिवकुमार के मामले में लंका थाने के कई पुलिस अधिकारियों और कांस्टेबल को सस्पेंड और ट्रांसफर भी किया जा चुका है। शिव के पिता 1 साल तक बनारस की गलियों और सड़कों पर ढूंढते-ढूंढते मजबूरन जब खाने को कुछ नहीं बचा तो पन्ना स्थित अपने घर लौट गए। ऐसे में पुलिस महकमा से पेंडिंग मामलों के जल्द निस्तारण पर जनता को भरोसा नहीं है।

 

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