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Thursday, January 15, 2026

अब यूपी में दोपहिया खरीदने पर लेना होगा दो हेलमेट

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अब दोपहिया वाहन खरीदने पर चालक और पीछे बैठने वाली सवारी दोनों के लिए अलग-अलग आईएसआई प्रमाणित हेलमेट लेना अनिवार्य होगा। 


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वाहन विक्रेता को यह सुनिश्चित करना होगा कि ग्राहक को दो हेलमेट दिए जाएं। इस व्यवस्था का प्रमाण पंजीकरण से जुड़े दस्तावेजों के साथ वाहन पोर्टल पर अपलोड करना होगा

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सड़क दुर्घटनाओं में हो रही मौतों को कम करने के उद्देश्य से परिवहन विभाग ने हेलमेट नियमों को सख्त करने के निर्देश जारी किए हैं

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विभाग के अनुसार दोपहिया वाहन चालकों और पिलियन सवार द्वारा हेलमेट न पहनना गंभीर चोट और मौत का प्रमुख कारण बन रहा है.

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संभल में अवैध निर्माणों पर चला बुलडोजर, प्रधान का घर भी ध्वस्त

संभल: जिले में बुधवार को बुलडोजर गरजा. संभल तहसील क्षेत्र के बिछोली गांव में सुबह ही जिला प्रशासन ने सरकारी जमीन पर वर्षों से चले आ रहे अवैध कब्जों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दी. आरआरएफ, भारी पुलिस फोर्स और जिला प्रशासन के अधिकारियों की मौजूदगी में स्कूल, पंचायत घर, उद्यान और खेल के मैदान के नाम दर्ज करीब 20 बीघा बेशकीमती सरकारी भूमि को कब्जा मुक्त कराया. तहसीलदार संभल धीरेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में दो बुलडोजर ने अवैध निर्माण को ध्वस्त किया.


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बिछोली गांव में बुधवार की सुबह जैसे ही बुलडोजर चलने की तैयारी शुरू हुई तो कुछ कब्जेदारों ने विरोध जताया और प्रशासन से नोंकझोंक भी हुई. माहौल कुछ देर के लिए तनावपूर्ण जरूर हुआ, लेकिन आरआरएफ और भारी पुलिस बल की मुस्तैदी के चलते हालात बेकाबू नहीं होने दिए गए. तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि अवैध कब्जों की सूची में ग्राम प्रधान अतीक का नाम भी शामिल था. प्रशासन ने किसी दबाव में आए बिना सबसे पहले प्रधान द्वारा बनाए गए अवैध मकान को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया. यह दृश्य गांव में चर्चा का बड़ा विषय बन गया.

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मौके पर मौजूद तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि जिस जमीन पर कार्रवाई की जा रही है, वह पंचायत घर, प्राथमिक विद्यालय, उद्यान और खेल मैदान के लिए राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है. इस भूमि पर किए गए कब्जों के खिलाफ विभिन्न न्यायालयों में मुकदमे पहले ही निस्तारित हो चुके हैं और बेदखली के स्पष्ट आदेश पारित हैं. इसके बावजूद कब्जेदार हठधर्मिता दिखाते हुए जमीन खाली नहीं कर रहे थे, जिस कारण प्रशासन को यह सख्त कदम उठाना पड़ा.

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तहसीलदार ने बताया कि पैमाइश की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी और सभी चिह्नित अवैध कब्जे हटाए जा रहे हैं. इनमें कुछ आवासीय और कुछ धार्मिक प्रकृति के कब्जे भी शामिल हैं. उन्होंने बताया कि ग्राम प्रधान के घर सहित 5 मकानों को ध्वस्त किया गया है. कार्रवाई के दौरान लेखपाल, कानूनगो, राजस्व निरीक्षक सहित 25 सदस्यीय राजस्व टीम मौके पर तैनात. प्रशासन की इस कार्रवाई से गांव में स्पष्ट संदेश गया है कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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जम्मू कश्मीर में 82 हजार से अधिक पेड़ काटे गए और 45 करोड़ रुपये का मुआवजा बकाया, NGT सख्त

श्रीनगर: जम्मू और कश्मीर प्रशासन नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के सामने यह मानने के बाद कड़ी न्यायिक जांच के दायरे में आ गया है कि इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए जरूरी अनिवार्य पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति जमा किए बिना 82,000 से ज़्यादा जंगल के पेड़ काट दिए गए, जिससे 45 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया रह गया.


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यह खुलासा रसिख रसूल भट बनाम केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर मामले की कार्यवाही के दौरान किया गया, जिसकी सुनवाई ट्रिब्यूनल ने 13 जनवरी, 2026 को की थी. जम्मू और कश्मीर के मुख्य सचिव की दी गई अनुपालन रिपोर्ट में, केंद्र शासित प्रदेश ने माना कि जंगल वाले इलाकों में किए गए लगभग 150 प्रोजेक्ट्स में 82,327 पेड़ काटे गए. रिपोर्ट में कहा गया है कि इन प्रोजेक्ट्स से होने वाली कुल प्रतिपूरक वनीकरण दायित्व 80.73 करोड़ रुपये है, जिसमें से 45.33 करोड़ रुपये अभी तक भुगतान नहीं किए गए हैं.

पर्यावरण कानून के तहत, जंगल की जमीन के दूसरे इस्तेमाल से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजे के तौर पर पेड़ लगाने का भुगतान जरूरी है. इस बात को मानने से प्रशासन के वन एक्ट, 1980 के पालन पर सवाल उठे हैं, जिसमें यह जरूरी है कि जंगल की जमीन को गैर-वन कामों के लिए इस्तेमाल करने से पहले उपयोगकर्ता एजेंसियां मुआवज़े के तौर पर ली जाने वाली लेवी जमा करें.

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केंद्र शासित प्रदेश के अनुसार, यह चूक 30 जुलाई, 2019 को पहले की राज्य प्रशासनिक काउंसिल द्वारा लिए गए पॉलिसी फैसले की वजह से हुई है. उस फैसले ने 2014 के कैबिनेट ऑर्डर को बदल दिया और सरकार को जंगल की जमीन के डायवर्जन के लिए मंज़ूरी देने की इजाजत दे दी, भले ही मुआवजे का भुगतान पेंडिंग हो. अधिकारियों ने कहा कि इस कदम का मकसद सार्वजनिक अवसंरचना के कामों को तेजी से पूरा करना था.

हालांकि, याचिकाकर्ता, पर्यावरणविद् और अधिवक्ता रसिख रसूल भट ने पॉलिसी में इस बदलाव का कड़ा विरोध किया है. 8 जनवरी, 2026 को ट्रिब्यूनल के सामने दायर की गई आपत्तियों में, भट ने तर्क दिया कि यह फैसला मनमाना था और कानूनी पर्यावरण सुरक्षा उपायों को कमजोर करता है.

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उन्होंने कहा कि इस छूट से पर्यावरण के नुकसान को रोकने के बजाय, बाद में जंगल कानून के उल्लंघन को सही ठहराया गया. भट्ट ने कहा कि मुआवजा देने का तरीका फॉरेस्ट क्लीयरेंस की एक मुख्य जरूरत है और इसे मंज़ूरी के बाद की औपचारिकता नहीं माना जा सकता.

ट्रिब्यूनल की नजर में आने वाले खास प्रोजेक्ट्स में से एक उत्तर कश्मीर में हंदवाड़ा-बंगस रोड है, जो पर्यावरण के रूप से संवेदनशील राजवार फॉरेस्ट रेंज से होकर गुजरता है. इस सड़क का काम लोक निर्माण विभाग कर रहा है. याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि प्रोजेक्ट पर कंस्ट्रक्शन 2017 में शुरू हुआ था, जो सितंबर 2019 में अंतिम वन मंजूरी मिलने से लगभग दो साल पहले था.

हालांकि प्रशासन ने ट्रिब्यूनल के सामने माना कि 488 पेड़ सही मंज़ूरी लेकर काटे गए थे, लेकिन उसने यह भी माना कि 2021 में गैर-कानूनी तरीके से पेड़ काटे गए थे, जिसके लिए बाद में नुकसान की भरपाई की गई. भट ने आगे कहा कि ऐसे प्रोजेक्ट्स ने राजवार इलाके में इंसान-जानवरों के बीच टकराव को बढ़ा दिया है.

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उन्होंने बताया कि जंगल के प्रस्तावों में खुद इलाके में जंगली जानवरों की मौजूदगी दर्ज थी, फिर भी कहा जाता है कि प्रोजेक्ट्स बिना बड़े वाइल्डलाइफ मैनेजमेंट या नुकसान कम करने की योजना के आगे बढ़े. सुनवाई के दौरान केंद्र शासित प्रदेश की ओर से पेश वकील ने मुख्य सचिव की अनुपालन रिपोर्ट के खिलाफ उठाई गई आपत्तियों का जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा.

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की प्रधान पीठ, जिसके चेयरमैन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव हैं, ने सभी पार्टियों को अपनी दलीलें पूरी करने और जरूरी रिपोर्ट रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया. ट्रिब्यूनल ने मामले की आखिरी सुनवाई 9 अप्रैल, 2026 को तय की है।

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Wednesday, January 14, 2026

वाराणसी में चाइनीज मांझे का जानलेवा आतंक; दुर्गाकुंड में हेलमेट के बावजूद युवती का चेहरा कटा, लोहता में युवक गंभीर रूप से घायल

वाराणसी: प्रतिबंधित चाइनीज मांझे का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है, जिसकी चपेट में आने से बुधवार को दो अलग-अलग घटनाओं में एक युवती और एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। सबसे दर्दनाक घटना भेलूपुर थाना क्षेत्र के दुर्गाकुंड इलाके में हुई, जहाँ स्कूटी सवार एक युवती मांझे की चपेट में आ गई। इस घटना की सबसे डराने वाली बात यह रही कि युवती ने सुरक्षा के लिए हेलमेट पहन रखा था, इसके बावजूद मांझे की धार इतनी तेज थी कि उसका चेहरा बुरी तरह कट गया। युवती को लहूलुहान अवस्था में तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उसका उपचार जारी है। यह पूरी घटना पास में लगे एक सीसीटीवी कैमरे में भी कैद हो गई है।


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दुर्गाकुंड की इस घटना ने एक बार फिर प्रशासन के दावों और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, युवती अपनी सामान्य गति से स्कूटी चला रही थी कि अचानक हवा में लटक रहा मांझा उसके गले और चेहरे पर फंस गया। हेलमेट का शीशा गिरा होने के बाद भी मांझा त्वचा तक पहुँच गया, जिससे गहरा घाव हो गया। मौके पर मौजूद लोगों ने आनन-फानन में उसे अस्पताल पहुँचाया। सीसीटीवी फुटेज में हादसे की भयावहता साफ देखी जा सकती है, जिसने स्थानीय लोगों में दहशत पैदा कर दी है। युवती का नाम कृति गिरी, पुत्री अनिल गिरी निवासी कंदवा बताया जा रहा है।

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इसी तरह की एक अन्य घटना में लोहता के चुरामनपुर निवासी जितेंद्र मौर्य भी चाइनीज मांझे का शिकार बने। जितेंद्र अपनी मोटरसाइकिल से रामनगर की ओर जा रहे थे। अभी वह सामने घाट पुल पार करने ही वाले थे कि अचानक मांझा उनके चेहरे पर आकर लिपट गया। इस हादसे में मांझे की धार ने उनकी दोनों पलकों और नाक पर गहरा कट मार दिया, जिससे वह सड़क पर ही गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़े।

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घटनास्थल पर मौजूद राहगीरों ने सक्रियता दिखाते हुए जितेंद्र को तत्काल रामनगर स्थित अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टरों ने बताया कि मांझा आँखों के बेहद करीब था, जिससे उनकी दृष्टि को भी खतरा हो सकता था, लेकिन समय रहते उपचार मिलने से फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर बनी हुई है। पुलिस की तमाम पाबंदियों और छापेमारी के बावजूद बाजार में चाइनीज मांझे की उपलब्धता और उसका बेखौफ इस्तेमाल राहगीरों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है।

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लुठाकला में अवैध खनन पर छापा, प्रदीप यादव गिरोह का ट्रैक्टर-ट्राली सीज


वाराणसी: चौबेपुर थाना क्षेत्र के गंगा किनारे स्थित गांव लुठाकला में अवैध खनन के खिलाफ खनन विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक ट्रैक्टर-ट्राली को सीज किया गया है। बीते सोमवार की रात बालू मिश्रित मिट्टी के अवैध खनन की सूचना पर खनन निरीक्षक अनुज कुमार सिंह ने चौबेपुर पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे और दबिश देकर वाहन को पकड़ लिया।

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पकड़ा गया ट्रैक्टर-ट्राली जो कि राहुल यादव निवासी सिंघुलपुर का है जिस पर बालू मिश्रित मिट्टी लदा हुआ था. जो गंगा किनारे से अवैध रूप से निकाला जा रहा था। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह ट्रैक्टर-ट्राली क्षेत्र में अवैध खनन का पर्याय बने प्रदीप यादव के गिरोह से जुड़ा बताया जा रहा है।

खनन निरीक्षक अनुज कुमार सिंह ने वाहन को कब्जे में लेकर चौबेपुर पुलिस को सौंप दिया, जिसके बाद पुलिस ने ट्रैक्टर-ट्राली को थाने लाकर सीज कर दिया। मामले में खनन अधिनियम के तहत आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।

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खनन विभाग ने स्पष्ट किया है कि अवैध खनन के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और इसमें संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। तो वही चौबेपुर प्रभारी इंद्रेश कुमार ने बताया कि जैसे ही हमें खनन निरीक्षक ने इसकी सुचना दी हमने एक टीम उनके बताये लोकेशन पर भेज दिया जिसका परिणाम सबके सामने है और आगे भी खनन विभाग के साथ ऐसे ही कार्यवाही होती रहेगी.

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Tuesday, January 13, 2026

विकास प्राधिकरण के सचिव ने भूमि अधिग्रहण के संबंध में नेवादा के किसानों के साथ बैठक कर दी धमकि

वाराणसी: विकास प्राधिकरण के सचिव वेदप्रकाश मिश्र ने मंगलवार को मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना हेतु जमीन अधिग्रहण के सम्बंध में नेवादा में किसानों संग बैठक कर जानकारी दी।



मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना हेतु वीडीए द्वारा पांच गांवों मढ़नी, शंकरपुर, गौराकलॉ, नेवादा और बभनपुरा में जमीनों के खरीद बिक्री पर रोक लगा दी गयी थी। वीडीए सचिव द्वारा कुछ लेखपालों व किसानों के साथ बैठक कर कहा कि आप लोग जमीन अधिग्रहण में व्यवधान मत डालिये। हमारा सहयोग कीजिये। 

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उन्होंने कहा कि हम मार्च तक हम आप सभी के सहमति का इंतजार करेंगे। उसके बाद अधिग्रहण की कार्यवाही शुरू कर देगें। जिसको न्यायालय जाना होगा जायेगा। जब तक मुकदमा लड़ेंगे तब तक प्रोजेक्ट पूरा हो जायेगा।

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उल्लेखनीय है कि बीते तीन दिनों से वीडीए सचिव द्वारा किसानों को फोन कर कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना में शंकरपुर, बभनपुरा, गौराकलॉ और नेवादा के जमीन की खरीद बिक्री पर रोक नहीं है। केवल मढ़नी के जमीन की खरीद बिक्री पर रोक है. 

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जब उनसे किसानों ने पूछा कि कोई पत्र जारी किया गया है तो दिखाइये। वह दिखा नहीं पाये और सवालों से भागते नजर आए। बैठक में संजय तिवारी, कृष्णकांत तिवारी, प्यारेलाल, गुलाब, बालकृष्ण, अजय आदि किसान शामिल थे।

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अभी नहीं निकली ठंड की हवा, इस साल 6-6 घंटे में 11 डिग्री तक बदला पारा; धूप से पारा 24 डिग्री

लखनऊ: चार दिन से बढ़ते तापमान और तेजी धूप से काशीवासियों को महसूस हो रहा है कि ठंड की हवा ही निकल चुकी है। लेकिन ऐसा नहीं है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक 15 जनवरी से नया पश्चिमी विक्षोभ आने हिमालय की ओर आ रहा है। ऐसे में बर्फीली हवाओं का दौर फिर से शुरू हो सकता है। वहीं अगले दो दिन तक कोहरे का यलो अलर्ट भी जारी कर दिया गया है। इस पूरी जनवरी तापमान में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।


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सोमवार को वाराणसी का अधिकतम तापमान सामान्य से 0.6 डिग्री ज्यादा 22.3 डिग्री सेल्सियस, वहीं न्यूनतम तापमान सामान्य से 0.3 डिग्री नीचे 8.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। चार दिन पहले वाराणसी का जो अधिकतम पारा 11 डिग्री तक था वो अब बढ़कर 24 डिग्री तक पहुंच गया है। मौसम वैज्ञानिक भी तापमान के इस तीव्र उतार-चढ़ाव को देख हैरान हैं। इस साल जनवरी के 12 दिनों में वाराणसी के तापमान के ग्राफ तेजी से उतार-चढ़ाव देखे गए। मात्र 6-7 घंटे में तापमान 10-12 डिग्री तक ऊपर-नीचे हुआ है। 

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सात जनवरी को तापमान 6.8 डिग्री से 16.3 डिग्री रहा फिर 8 जनवरी को तापमान 4.8 डिग्री से लेकर 11.6 डिग्री सेल्सियस आ गया था। वहीं अगले दिन 9 जनवरी को पारा 6.6 डिग्री से 18.8 डिग्री पहुंच गया। आमतौर पर जनवरी महीने का औसत अधिकतम औसत पारा 22.8 डिग्री सेल्सियस और औसत न्यूनतम तापमान 9.1 डिग्री सेल्सियस तक है। *इस जनवरी के 12 दिनों का तापमान कुछ इस प्रकार का रहा है 1 जनवरी - 7.4 डिग्री से 19.3 डिग्री,  2 जनवरी - 8.5 डिग्री से 20.7 डिग्री, 3 जनवरी - 11.8 डिग्री से 17.6 डिग्री, 4 जनवरी - 13 डिग्री से 17.6 डिग्री, 5 जनवरी - 6.5 डिग्री से 15.9 डिग्री, 6 जनवरी - 5.5 डिग्री से 14.5 डिग्री, 7 जनवरी - 6.8 डिग्री से 16.3 डिग्री, 8 जनवरी - 4.8 डिग्री से 11.6 डिग्री, 9 जनवरी - 6.6 डिग्री से 18.8 डिग्री, 10 जनवरी - 6 डिग्री से 22.8 डिग्री और  11 जनवरी - 7.8 डिग्री से 23.4 डिग्री.

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शीतलहर और पाले की संभावना बढ़ी

यूपी आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अतुल कुमार सिंह ने बताया कि तापमान में गिरावट के चलते प्रदेश में रात के समय शीतलहर और पाले की संभावना बढ़ गई है। पश्चिमी विक्षोभ के गुजरने के बाद हवाओं की दिशा फिर से बदलकर उत्तरी पश्चिमी हो जाने से बीते 24 घंटों में तापमान में गिरावट आ सकती है। पूर्वांचल के कुछ हिस्सों के अलावा शेष भाग में दिन और रात के तापमान में 1-3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आ सकती है। वहीं कहीं-कहीं न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे चले जाने से शीतलहर जैसी स्थिति बनी है।

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