वाराणसी। इस वर्ष होली का पर्व चंद्रग्रहण के कारण एक दिन आगे बढ़ गया है। होलिका दहन के अगले दिन पड़ने वाले चंद्रग्रहण के चलते रंगोत्सव अब तीन मार्च के बजाय चार मार्च को मनाया जाएगा। चंद्रग्रहण का आरंभ दोपहर 3:20 बजे होगा। यह भारत में ग्रस्तोदित रूप में दिखाई देगा, यानी चंद्रोदय के साथ इसे देखा जा सकेगा।
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ग्रहण का दृश्य प्रभाव शाम 5:59 बजे से 6:48 बजे तक रहेगा। सूतक काल ग्रहण से नौ घंटे पहले, यानी सुबह 6:20 बजे से प्रारंभ होगा। सूतक काल के दौरान जप, तप, हवन और मंत्र जाप जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। इस समय केवल पूजा-पाठ, भगवन्नाम संकीर्तन और साधना की जाती है। ग्रहण के दौरान उत्सव, भोजन और अन्य मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।
यह पूर्ण चंद्रग्रहण होगा, जिसमें पृथ्वी की छाया पूरी तरह चंद्रमा पर पड़ती है। इस कारण चंद्रमा कुछ समय के लिए गहरे लाल रंग का दिखाई देता है, जिसे ‘ब्लड मून’ कहा जाता है। इस अद्भुत खगोलीय घटना का अनुभव करने के लिए लोग उत्सुक हैं, क्योंकि यह न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि खगोल विज्ञान के प्रेमियों के लिए भी एक विशेष अवसर है।
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ग्रहण के समय कई लोग अपने धार्मिक अनुष्ठान और साधनाओं में लीन रहेंगे। इस दौरान विशेष ध्यान रखा जाएगा कि कोई भी अशुभ कार्य न किया जाए। सूतक काल के दौरान, लोग अपने घरों में रहकर ध्यान और साधना करेंगे, जिससे उन्हें मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त हो सके। जबकि होलिका एक दिन पूर्व ही जल जाएगी और होली का पर्व मनाने के लिए एक दिन का इंतजार करना पड़ेगा।
इस चंद्रग्रहण के दौरान, कई धार्मिक मान्यताएँ भी जुड़ी हुई हैं। मान्यता है कि ग्रहण के समय किए गए अनुष्ठान विशेष फलदायी होते हैं। इसलिए, भक्तजन इस समय का उपयोग अपने जीवन में सकारात्मकता लाने के लिए करेंगे। तीन मार्च को होने वाला ‘ब्लड मून’ न केवल एक खगोलीय घटना है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और परंपरा का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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