वाराणसी: प्रदेश की मौजूदा सरकार जहां एक ओर पर्यावरण संरक्षण के लिए हर वर्ष बृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम के लिए लाखों रुपए खर्च करती है वहीं दूसरी ओर चिरईगांव खण्ड विकास अधिकारी प्रदेश सरकार के पर्यावरण संरक्षण अभियान को असफल करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। व्यासपुर ग्राम पंचायत के झांझूपुर गांव में सामने आया है जहां महज एक अन्नपूर्णा भवन के निर्माण के लिए शीशम और सागौन दो बड़े पुराने व हरे पेड़ों को काटने में जरा भी संकोच नहीं किया गया।
बताया जा रहा है कि यहां पर बड़े व हरे पेड़ों को काटने के लिए वन विभाग की अनुमति भी लेना जरूरी नहीं समझा गया। अन्नपूर्णा भवन के निर्माण के लिए दो बड़े व हरे पेड़ों को वन विभाग से एनओसी लिये बगैर किसके आदेश पर कौन कटवाया। इस सवाल पर जिम्मेदार लोगों की बोलती बंद है। सूचना पाकर शुक्रवार को वन विभाग के क्षेत्रीय कर्मचारी अरविन्द कुमार मौके पहुंचे तो देखा कि दोनों बड़े व हरे पेड़ो को काटने के बाद जमीन पर टुकड़े-टुकड़े करके रखा गया था।
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पेड़ काटने के सम्बंध में वनकर्मी ने फोन से ब्यास पुर के ग्राम प्रधान सुरेन्द्र से पूंछा गया तो ग्राम प्रधान ने पेड़ कटवाने की जानकारी नहीं होने की बात कही। जबकि कुछ ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम प्रधान की उपस्थिति में पेड़ काटे गये हैं। वनकर्मी ने बयान लेने के लिए ग्राम प्रधान को मौके पर बुलाया तो वे बहानेबाजी करने लगे। वनकर्मी ने लगभग दो घंटे तक ग्राम प्रधान का इंतजार किया लेकिन वे मौके पर नही आये।
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तो वहीं ग्राम प्रधान ने बताया कि कुछ दिनों पहले चिरईगांव के खण्ड विकास अधिकारी लेखपाल व पंचायत सचिव के साथ यहां पर आये थे और उन्होंने बताया था कि यहीं पर अन्नपूर्णा भवन बनवाने हेतु जमीन चिन्हित की गयी है। वहीं वनकर्मी अरविन्द कुमार का कहना है कि मैंने मौके की फोटोग्राफी व वीडियो बनाने के साथ ही वन विभाग के उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया है नियमानुसार कार्रवाई होगी।

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