लंबे समय से यूपी में वापसी की कोशिश में जुटी कांग्रेस हर मुद्दे पर मुखर है। पिछले दिनों प्रियंका गाँधी ने लड़की हूं, लड़ सकती हूं पोस्टर जारी किया और महिलाओं को 40 टिकट की घोषणा कर दी। प्रियंका गाँधी ने सरकार बनने पर लड़कियों को स्कूटी, स्मार्ट फोन देने की भी प्रतिज्ञा की।
एक सवाल के जवाब में प्रियंका गाँधी ने कहा देखिए आप इसको चुनाव से जोड़कर देख रहे हैं। चुनाव बस एक
जरिया है। लेकिन मैं चाहती हूं कि आप महिलाओं को 40 फीसदी टिकट देने की घोषणा को बड़े दायरे में देखें। उत्तर प्रदेश में
जब भी महिलाओं पर अत्याचार हुआ और मैं जहां भी पीड़ितों से मिलने गई, मैंने मीडिया के माध्यम से अपनी बहनों को कहा कि आगे आओ, चुनाव लड़ो, राजनीति
में भागीदारी बढ़ाओ। महिलाओं का हित सोचने वाली राजनैतिक व्यवस्था बनाने के लिए
ज्यादा महिलाओं का निर्णय लेने वाली जगहों पर होना जरूरी है। भारतीय राजनीति के
लिए यह एक क्रांतिकारी कदम है। इसको लेकिन, किंतु, परंतु के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि ऐसे सोचना चाहिए कि इस विचार का समय आ चुका है। मैंने
इस कदम को यूपी में उठाया क्योंकि मुझे यहां के बारे में निर्णय लेने की
जिम्मेदारी दी गयी है। आशा है कि यह राजनीति में महिलाओं की भूमिका-भागीदारी की
बड़ी लकीर खींचेगा।
लड़की
हूं, लड़ सकती हूं पोस्टर से क्या बेटियों
को जोड़ने में मदद मिलेगी?
प्रियंका गाँधी ने कहा लड़की हूं, लड़ सकती हूं ये महिलाओं की रोजमर्रा की जिंदगी से उपजा विचार है। आज
महिलाएं पढ़ने जा रही हैं, प्लेन उड़ा रही हैं, सेना में सेवाएं दे रही हैं, खेल-कूद में मेडल ला रही हैं, प्रधान से लेकर प्रधानमंत्री तक बन रही हैं, कम्पनियों की कमान सम्भाल रही
हैं। लड़कियां हर उस रूढ़िवादिता से लड़ सकती हैं, जो उन्हें कमतर या कमजोर आंकती है। लड़की हूं, लड़ सकती हूं महिलाओं की एक
पुकार है, जो
महिलाओं को कह रही हैं कि तुम पीड़ित नहीं हो, तुम मजबूत हो, मजबूती पहचानो, एकजुट होकर, समाज में खुद बदलाव लाओ, भविष्य बनाओ।
प्रियंका
गाँधी ने सिर्फ लड़कियों को स्कूटी और स्मार्टफोन देने की घोषणा क्यों की?
प्रियंका गाँधी ने कहा यह
समय ही बता सकता है। लेकिन एक चीज जरूर होगी, यूपी में महिलाओं के प्रतिनिधित्व का एक नया दौर शुरू होगा। मैंने
अभी आपको बताया कि आगरा जाते वक्त जब मैं स्कूल की लड़कियों से मिली तब उनकी तरफ
से यह विचार आया। सुरक्षा, शिक्षा के लिए लड़कियों को स्मार्ट फोन, स्कूटी की जरूरत है। यह तोहफे
नहीं हैं, वोट
के लिए प्रलोभन नहीं है, ये दोनों चीजें शिक्षा में मदद करेंगी और सपनों को पूरा करने की राह
आसान बनाएंगी। कुछ ऐसी पार्टियां हैं, जो सोचती हैं कि एक गैस सिलेंडर देकर महिलाओं को खुश कर देंगे, उनका वोट पाएंगे। मैं कहती हूं, मेरी पार्टी तो तीन सिलेंडर देगी, यह काफी नहीं है। उनका अस्तित्व
पहचानिये, सम्मान
करिए, आगे
बढ़ने को सुविधाएं दीजिए। मेरे पिता का पंचायती राज में महिलाओं की हिस्सेदारी ऐसा
ही निर्णय था। 40 टिकट
ऐसा निर्णय है,जो
भविष्य बदलेगा।
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