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Saturday, October 09, 2021

मायावती चुनाव आयोग से प्री पोल सर्वे पर रोक लगाने की मांग करेंगी

यूपी विधानसभा चुनाव में छोटे दलों के गठबंधन से जनता को सावधान रहने की अपील करते हुए बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि चुनाव पूर्व सवेर्क्षण पर रोक लगाने के लिए वह जल्द ही चुनाव आयोग को पत्र लिखेंगी। पार्टी संस्थापक कांशीराम के 15वें परिनिवार्ण दिवस के मौके पर श्रद्धाजंलि सभा को संबोधित करते हुए बसपा सुप्रीमो सुश्री मायावती ने शनिवार को कहा कि कुछ लोग बसपा को कमजोर आंकने का दुष्प्रचार कर रहे हैं हालांकि उनकी गलतफहमी आज के जनसैलाब को देखकर दूर हो गयी होगी।



अगले साल यूपी में सरकार बनाने का दावा करते हुए उन्होने कहा कि जनता को कांग्रेस, बीजेपी, सपा और आप के हवा हवाई वादों से सजग रहना चाहिए जिनमें तनिक भी दम नहीं है। अनुशासन प्रिय और पारदर्शी सरकार सिर्फ बसपा दे सकती है जो समाज के सभी वर्गों के लिए काम करेगी। गरीब,मजदूरों के अलावा ब्राह्मणों तथा मुस्लिमों की सुरक्षा और सम्मान का पूरा ख्याल रखा जाएगा। यूपी में सरकार बनने पर गरीब और सभी बेरोजगार को रोटी-रोजी के साधन उपलब्ध कराने को प्राथमिकता दी जाएगी और पार्टी इसी मुद्दे के साथ चुनाव मैदान पर उतरेगी।


बसपा सुप्रीमो सुश्री मायावती ने कहा कि प्रदेश की जनता ने बीजेपी, समाजवादी पार्टी तथा कांग्रेस का नाटक देख लिया है। बहुजन समाज पार्टी के लोग भी इनके नाटक हथकंडों से सावधान रहें। 2007 में बहुजन समाज पार्टी ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनने पर प्रदेश को बेहतरीन कानून व्यवस्था दी थी। उनकी अपील है कि इस बार जनता बीजेपी के झूठे वादे और प्रलोभन में आकर अपना वोट खराब न करे।

 

बसपा सुप्रीमो सुश्री मायावती ने कहा कि वह चुनाव आयोग को पत्र लिखकर विभिन्न चैनलों और एजेंसियों के चुनाव पूर्व सवेर्क्षण पर रोक लगाने की मांग करेंगी। जनता को इन सवेर्क्षणों से भ्रमित होने की जरूरत नहीं है। इससे पहले भी बंगाल और दिल्ली के चुनाव नतीजे ऐसे सवेर्क्षणों को गलत साबित कर चुके हैं। बसपा सुप्रीमो सुश्री मायावती ने कहा कि यूपी की सत्ता में काबिज होने के बाद उनकी सरकार बदले की भावना से काम नहीं करेगी और केन्द्र और पूर्ववर्ती राज्य सरकार की योजनाओं को समय से पूरा कराया जाएगा। अयोध्या,वाराणसी और मथुरा में जारी विकास कार्यों को तेजी से पूरा कराया जाएगा।


एआईएमआईएम और भीम आर्मी का नाम लिए बगैर उन्होने कहा कि प्रदेश में कुछ ऐसी भी छोटी-छोटी पार्टियां व दल हैं जो अकेले या गठबंधन कर चुनाव लड़ सकते हैं। इनका मकसद चुनाव जीतना नहीं, बल्कि अपने स्वार्थ के लिए पर्दे के पीछे से खासकर सत्ताधारी पार्टी को फायदा पहुंचाना होता है। यह छोटी पार्टियां उन्हीं के हिसाब से अपने प्रत्याशी खड़े करती हैं, इसलिए ऐसी पार्टियों और दलों से सावधान रहने की जरूरत है। समाजवादी पार्टी (सपा) का नाम लिए बगैर उन्होने कहा कि एक ऐसी पार्टी भी है जो स्वार्थी और टिकटार्थियों को शामिल कर अपना कुनबा बढ़ा रही है।

 

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