वाराणसी. खौफ का दूसरा नाम था दीपक वर्मा। दीपक वर्मा खुद को मौत का सौदागर कहलाता था। रईस बनारसी के मारे जाने के बाद उसने खुद का अपना साम्राज्य स्थापित कर रखा था। आखिर खौफ का अंत हुआ और आतंक का दूसरा नाम बना दीपक वर्मा पुलिस मुठभेड़ में ढेर हो गया।
हमारे संवाददाता के अनुसार आज चौबेपुर थाना क्षेत्र के बरियासनपुर गाँव के पास रिंग रोड पर आतंक का दूसरा नाम कहे जाने वाले दीपक वर्मा और एसटीऍफ़ का आमना सामना हो गया। एसटीऍफ़ के क्षेत्राधिकारी शैलेश सिंह के नेतृत्व में एसटीऍफ़ टीम दीपक वर्मा का पीछा कर रही थी। इस दौरान रिंग रोड निकट बरियासनपुर गाँव के पास दीपक वर्मा ने पुलिस टीम पर गोली चला दिया।
जबाबी कार्यवाही में एसटीऍफ़ ने भी फायरिंग किया। इस फायरिंग में खुद को आतंक का सरगना समझने वाला दुर्दांत अपराधी दीपक वर्मा ढेर हो गया। जानकारी के अनुसार पुलिस को मौके पर दीपक वर्मा के पास से असलहा भी बरामद हुआ है। बारिश के दौरान पुलिस से हुई मुठभेड़ में गोलियों की आवाज़े सुनकर ग्रामीण अपने घरो में दुबक गए था।
हमारे संवाददाता क अनुसार 2016 में नैनी जेल के बहार हुए गोली कांड में भी दीपक वर्मा का नाम सामने आया था उसके बाद 2015 वाराणसी के पार्षद शिव सेठ के हत्या कांड में भी दीपक वर्मा मुख्या अपराधी था.



No comments:
Post a Comment